भाग 11 - आपात उपबंध - Page 272

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परंतु इस खंड की कोई बात राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय में निहित या उसके द्वारा प्रयोक्तव्य किसी शक्ति को अपने हाथ में लेने या उच्च न्यायालयों से संबंधित इस संविधान के किसी उपबंध के प्रवर्तन के पूर्णतः या भागतः निलंबित करने के लिए प्राधिकृत नहीं करेगी।

(2) ऐसी किसी उद्घोषणा को पश्चात्वर्ती उद्घोषणा द्वारा वापस लिया जा सकेगा या उसमें परिवर्तन किया जा सकेगा।

(3) इन अनुच्छेद के अधीन उद्घोषणा-

(क) संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी_

(ख) सिवाय वहां के जहां पूर्व उद्घोषणा को वापस लेने वाली उद्घोषणा है, छह मास बीतने पर प्रवर्तन में नहीं

रहेगीः

परंतु यदि और जितनी बार ऐसी उद्घोषणा को प्रवृत्त बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला संकल्प संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया जाता है तो उतनी बार यह उद्घोषणा, यदि वापस नहीं ली जाती है तो इस तारीख को जिसको इस खंड के अधीन वह अन्यथा प्रवर्तन में न रहती, बारह मास की अवधि तक और प्रवृत्त बनी रहेगी किन्तु ऐसी उद्घोषणा किसी भी दशा में तीन वर्ष से अधिक प्रवृत्त नहीं होगी।

(4) जहां इस अनुच्छेद के खंड (1) के अधीन जारी की गई उद्घोषणा द्वारा यह घोषणा की गई है कि राज्य के विधानमंडल की शक्तियां संसद द्वारा प्रयोक्तव्य होंगी वहां-

(क) संसद भारत सरकार या भारत सरकार के अधिकारियों और प्राधिकारियों को शक्तियां प्रदत्त करने वाली और शुल्क अधिरोपित करने वाली, या शक्तियां प्रदत्त करना और शुल्क अधिरोपित करने वाली विधियां बनाने के लिए सक्षम होगी_

(ख) राष्ट्रपति तब के सिवाय जब संसद के दोनों सदन सत्र में हों, इस संविधान के अनुच्छेद 102 के अधीन अध्यादेश प्रख्यापित करने के लिए सक्षम होगा।