1. लक्ष्य और उद्देश्य संबंधी संकल्प - Page 28

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क्या इस प्रक्रम पर ऐसा करना बुद्धिमत्तापूर्ण होगा? राजनीतिज्ञतापूर्ण होगा? प्रज्ञापूर्ण होगा? मेरा उत्तर है, ‘‘नहीं’’, यह बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं होगा। मेरा सुझाव है कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के विवाद को हल करने के लिए एक और प्रयास किया जाए। यह विषय इतना महत्वपूर्ण है कि मुझे पूरा विश्वास है कि इसका फैसला किसी एक पार्टी की प्रतिष्ठा मात्र के आधार पर नहीं किया जा सकता। राष्ट्रों की नियति का फैसला करते समय लोगों की प्रतिष्ठा, नेताओं की प्रतिष्ठा और पार्टियों की प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होना चाहिए। देश की नियति ही सर्वोपरि है। मैं यह महसूस करता हूँ कि मेरा डॉ. जयकर के संशोधन का समर्थन करना केवल संविधान सभा के हित में नहीं होगा, ताकि यह एक होकर काम कर सके, ताकि फैसला करने के पूर्व इसके समक्ष मुस्लिम लीग की प्रतिक्रिया भी आ सके। हमें इस पर भी अवश्य विचार करना चाहिए कि यदि हम अंधाधुंध काम करेंगे तो भविष्य के बारे में क्या होगा। मुझे नहीं मालूम, कांग्रेस पार्टी, जिसके कब्जे में यह सदन है, के मन में क्या योजनाएं हैं? ये क्या सोच रहे हैं, यह जानने के लिए मेरे पास कोई देवी शक्ति नहीं है। उनकी क्या युक्तियां हैं, क्या रणनीति है, मुझे नहीं मालूम। लेकिन जो मुद्दा उठा है, उस पर अनजान व्यक्ति के रुप में अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि केवल तीन तरीकों से ही भविष्य का विनिश्चय किया जाएगा। या तो एक पार्टी को दूसरी पार्टी की इच्छाओं के सामने झुकना होगा- यह भी एक तरीका है। दूसरा तरीका वह होगा जिसे मैं बातचीत से की गई शांति कहता हूँ और तीसरा तरीका होगा खुल्लम-खुल्ला लड़ाई। श्रीमान्, मैं संविधान सभा के कुछ सदस्यों से सुन रहा हूँ कि वे लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। मैं यह स्वीकार करता हूँ कि मैं इस ख्याल से दुखी हूँ कि इस देश में कोई भी व्यक्ति इस देश की राजनीतिक समस्याओं का हल लड़ाई की पद्धति से करे। मुझे नहीं मालूम इस देश में कितने लोग इस ख्याल का समर्थन करेंगे। कदाचित काफी संख्या में और मेरे विचार से इसका कारण है कि उनमें से अधिकांश, हर दशा में। उनमें से बहुत बड़ी संख्या का विश्वास है कि जिस लड़ाई की वे बात कर रहे हैं वह ब्रिटिश के खिलाफ होगी। ठीक है, श्रीमान् यदि सोची गई लड़ाई को, जो लोगों के मन में है, स्थानीय रुप दिया जाए। सीमित रुप दिया जाए जिससे कि वह ब्रिटिश विरोधी युद्ध से अधिक नहीं होगी। तो मुझे संभवतः इस प्रकार की रणनीति पर बहुत अधिक आपत्ति नहीं होगी। लेकिन क्या यह लड़ाई सिर्फ ब्रिटिशों के साथ होगी? मुझे कोई संकोच नहीं है और मैं यथासंभव स्पष्ट शब्दों में इस सदन के समझ यह रखना चाहता हूँ कि यदि इस देश में युद्ध चलता है और उस युद्ध का उस मुद्दे से कोई संबंध है जो आज हमारे सामने है जो वह लड़ाई ब्रिटिशों के खिलाफ नहीं होगी। वह मुसलमानों के खिलाफ होगी। वह लड़ाई मुसलमानों पर होगी अथवा संभवतः इससे भी बदतर वह लड़ाई उस लड़ाई से भिन्न कैसे होगी जिसका मुझे डर है। श्रीमान्, मैं सदन के समक्ष ‘‘अमेरिका से