भाग 15 - प्रकीर्ण - Page 288

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भाग 15

प्रकीर्ण

राष्ट्रपति 302. (1) राष्ट्रपति अथवा राज्य का राज्यपाल अपने पद की और राज्यपालों शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के पालन के लिए या उन का संरक्षण शक्तियों का प्रयोग और कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने द्वारा किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के लिए किसी न्यायालय का उत्तरदायी नहीं होगाः

परंतु अनुच्छेद 50 के अधीन आरोप के अन्वेषण के लिए संसद के किसी सदन द्वारा नियुक्त या अभिहित किसी न्यायालय, अधिकरण या निकाय द्वारा राष्ट्रपति के आचरण का पुनर्विलोकन किया जा सकेगाः परंतु यह और कि इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के विरुद्ध ऐसी कार्यवाहियां चलाने के किसी व्यक्ति के अधिकार को निर्बंधित करती है जो संविधान के भाग 10 के अध्याय 3 में वर्णित है। (2) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में किसी भी प्रकार की दंडिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जाएगी या चालू नहीं रखी जाएगी।

(3) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल की पदावधि के दौरान उसकी गिरफतारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय से कोई आदेशिका नहीं निकाली जाएगी। (4) राष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल के रुप में अपना पद ग्रहण करने से पहले या उसके पश्चात्, उसके द्वारा अपनी वैयक्तिक हैसियत में किए गए या किए जाने के लिए तात्पर्यित किसी कार्य के संबंध में कोई सिविल