270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
कार्यवाहियां, जिनमें राष्ट्रपति या ऐसे राज्य के राज्यपाल के विरुद्ध अनुतोष का दावा किया जाता है, उसकी पदावधि के दौरान किसी न्यायालय में तब तक संस्थित नहीं की जाएंगी जब तक कि कार्यवाहियों की प्रकृति, उनके लिए वाद हेतु, ऐसी कार्यवाहियों का संस्थित करने वाले पक्षकार का नाम, वर्णन, निवास-स्थान और उस अनुतोष का जिसका वह दावा करता है, कथन करने वाली लिखित सूचना, यथास्थिति, राष्ट्रपति या राज्यपाल को परिदत्त किए जाने या उसके कार्यालय में छोड़े जाने के पश्चात् दो मास का समय समाप्त नहीं हो गया है। निर्वचन आदि 303. (1) इस संविधान में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, निम्नलिखित पदों के निम्नलिखित अर्थ हैं,
अर्थात्ः
(क) ‘‘कृषि आय’’ से भारतीय आय-कर से संबंधित अधिनियमितियों के प्रयोजनों के लिए यथा परिभाषित कृषि-आय अभिप्रेत है.
(ख) ‘‘आंग्ल-भारतीय’’ से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका पिता या पितृ-परंपरा में कोई अन्य पुरुष जनक यूरोपीय उद्भव का है या था, किंतु जो भारत के राज्यक्षेत्र में अधिवासी है और जो ऐसे राज्य-क्षेत्र में ऐसे माता-पिता से जन्मा है या जन्मा था जो वहां साधारणतया निवासी रहे हैं और केवल अस्थायी प्रयोजनों के लिए वास नहीं कर रहे हैं_
(ग) ‘‘भारतीय ईसाई’’ से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो ईसाई धर्म के किसी भी रुप को मानता है और यूरोपीय या आंग्ल-भारतीय नहीं है।
(घ) ‘उधार लेना’ के अंतर्गत वार्षिकियां देकर धन लेना है और ‘‘ट्टण’’ का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा_ (ड.) ‘मुख्य न्यायमूर्ति’ के अंतर्गत उच्च न्यायालय के संबंध में मुख्य न्यायाधीश है।
(च) ‘‘निगम कर’’ से आय पर कोई भी कर अभिप्रेत है, जहां तक वह कर कंपनियों द्वारा संदेय है और ऐसा कर है