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विधान परिषद है, वहां राज्य के विधानमंडल के किसी
भी सदन में उस प्रयोजन के लिए विधेयक पुरःस्थापित
करके शुरु किया जा सकता है, और जब विधेयक
विधानसभा द्वारा या जहां राज्य में विधान परिषद है, वहां
राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों द्वारा यथास्थिति उस
विधानसभा या प्रत्येक सदन की कुल संख्या के बहुमत
पारित कर दिया जाता है तो वह अनुसमर्थन के लिए
संसद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और जब वह संसद
के प्रत्येक सदन द्वारा उस सदन की कुल सदस्य संख्या
के बहुमत से अनुसमर्थित कर दिया जाता है तो वह
राष्ट्रपति की अनुमति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा और
विधेयक को ऐसी अनुमति प्राप्त हो जाने पर संविधान
विधेयक के निबंधनों के अनुसार संशोधित हो जाएगा।
स्पष्टीकरणः जहां राज्यों का समूह पहली अनुसूची के
भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट है वहां संपूर्ण समूह इस
अनुच्छेद के खंड (1) के परंतुक के प्रयोजनों के लिए
एकल राज्य समझा जाएगा।
अल्पसंख्यकों 305. इस संविधान के अनुच्छेद 304 में अंतर्विष्ट किसी बात के लिए स्थानों के होते हुए भी, या तो संसद या पहली अनुसूची के का आरक्षण भाग-1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य के विधान केवल 10 वर्ष -मंडल में मुसलमानों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित तक प्रवृत्त रहना जनजातियों या भारतीय ईसाइयों के लिए स्थानों के जब तक कि आरक्षण विषयक इस संशोधन के उपबंध इस संविधान संविधान के के प्रारंभ से दस वर्ष की अवधि के दौरान संशोधित नहीं संशोधन द्वारा किये जाएंगे और उस अवधि के बीतने पर प्रभावी नहीं प्रवर्तनशील रहेंगे जब तक कि संविधान के संशोधन द्वारा प्रवर्तनशील नहीं बना रहता है न बने रहें।
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