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किन्तु संसद द्वारा बनाई गई कोई विधि, जिसे संसद इस
अनुच्छेद के उपबंधों के अभाव में, बनाने के लिए सक्षम
नहीं होती, उक्त अवधि की समाप्ति पर अक्षमता की
मात्रा तक उन बातों के सिवाय प्रभावी नहीं रहेगी जिन्हें
उस अवधि की समाप्ति के पहले किया गया है या करने
का लोप किया गया है।
विद्यमान विधियों 307. (1) अनुच्छेद 395 में निर्दिष्ट अधिनियमितियों का इस संविधान का प्रवृत्त बने द्वारा निरसन होने पर भी, किन्तु इस संविधान के अन्य रहना और उनका उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस संविधान के प्रारंभ से अनुकूलन ठीक पहले भारत के राज्यक्षेत्र में सभी प्रवृत्त विधि वहां
तब तक प्रवृत्त बनी रहेगी जब तक किसी सक्षम
विधानमंडल या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे परिवर्तित
या निरसित या संशोधित नहीं कर दिया जाता है।
(2) राष्ट्रपति, आदेश द्वारा, उपबंध कर सकेगा कि ऐसी
तारीख से जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, भारत के
राज्यक्षेत्र में या ऐसे राज्यक्षेत्र के किसी भाग में प्रवृत्त कोई
विधि, चाहे निरसन के रुप में या संशोधन के रुप में,
ऐसे अनुकूलनों और उपांतरणों के अधीन रहते हुए, जो
उसे उस विधि के उपबंधों को इस संविधान के उपबंधों
के अनुरुप बनाने के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत
हो, तब तक प्रभावी होगी जब तक कि उसका किसी
सक्षम प्राधिकारी द्वारा या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा
निरसन या संशोधन नहीं कर दिया जाता है, और ऐसे
किसी अनुकूलन या उपांतरण को किसी भी न्यायालय में
प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 1ः इस अनुच्छेद में, ‘‘प्रवृत्त विधि’’ पद
के अंतर्गत ऐसी विधि है जो इस संविधान के प्रारंभ से
पहले भारत के राज्यक्षेत्र में किसी विधानमंडल द्वारा या
अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित की गई है या बनाई गई
है और पहले ही निरसित नहीं कर दी गई है भले ही वह
या उसके कोई भाग तब पूर्वत- या किन्ही विशिष्ट क्षेत्रों
में प्रवर्तन में न हों।