278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
स्पष्टीकरण 2ः भारत के राज्यक्षेत्र में किसी विधानमंडल
द्वारा या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा पारित की गई या
बनाई गई ऐसी विधि का, जिसका इस संविधान के प्रारंभ
से ठीक पहले राज्य क्षेत्रातीत प्रभाव था और भारत के
राज्यक्षेत्र में भी प्रभाव था, यथापूर्वोक्त किन्हीं अनुकूलनों
और उपांतरणों के अधीन रहते हुए, ऐसा राज्य क्षेत्रातीत
प्रभाव बना रहेगा।
स्पष्टीकरण 3ः इस अनुच्छेद की किसी बात का यह
अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह किसी प्रवृत्त अस्थायी
अधिनियम को उसकी समाप्ति के लिए नियत तारीख के
बाद प्रवृत्त बना रहेगा।
फेडरल न्यायालय 308. (1) इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले फेडरल न्यायालय के न्यायाधीशों का के पदधारण करने वाले न्यायाधीश, यदि वे अन्यथा उच्चतम न्यायालय निर्वचन न कर चुके हों, तो ऐसे प्रारंभ पर उच्चतम के न्यायाधीश होना न्यायालय के न्यायाधीश हो जाएंगे और तब ऐसे वेतनों और फेडरल न्यायालय और भत्तों तथा अनुपस्थिति छुट्टी और पेंशन के संबंध में या परिषद हिज में ऐसे अधिकारों के हकदार होंगे जो उच्चतम न्यायालय मेजेस्टी के समक्ष के न्यायाधीशों के संबंध में अनुच्छेद 104 के अधीन लंबित कार्यवाहियों उपबंधित हैं।
का उच्चतम (2) इस संविधान के प्रारंभ पर फेडरल न्यायालय में लंबित न्यायालय में सभी सिविल या दांडिक वाद, अपील और कार्यवाहियां, अंतरण किया जाना उच्चतम न्यायालय को अंतरित हो जाएंगी और उच्चतम
न्यायालय को सुनने और उनका अवधारण करने की
अधिकारिता होगी और फेडरल न्यायालय द्वारा इस
संविधान के प्रारंभ से पहले सुनाए गए या दिए गए
निर्णयों और आदेशों का वही बल और प्रभाव होगा मानों
वे उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनाए गए हों या दिए गए हों।
* (3) इस संविधान के प्रारंभ से ही सपरिषद हिज मेजेस्टी की
भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी न्यायालय की डिक्री
* समिति सोचती है कि सपरिषद हिज मेजेस्टी के समक्ष लंबित सभी अपीलों और अन्य कार्यवाहियों का
तब तक अंतिम रूप से निपटारा कर दिया जाएगा जब तक संविधान प्रवृत्त होता है। फिर भी यदि कुछ
अपीलें या अन्य कार्यवाहियां संविधान के प्रारंभ के समय सपरिषद हिज मेजेस्टी के समक्ष लंबित रह
जाएंगी और उच्चतम न्यायालय को इसमें कठिनाई महसूस होती है तो राष्ट्रपति इस विषय में ‘समस्याओं
का निपटारा’ खंड (अनुच्छेद 313) के तहत आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।