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या आदेश के विरुद्ध या के संबंध में अपीलों और
याचिकाओं को ग्रहण करने या निपटाने की अधिकारिता,
जिसके अंतर्गत हिज मेजेस्टी के परमाधिकार के फलस्वरुप
हिज मेजेस्टी द्वारा प्रयोक्तव्य दांडिक मामलों से संबंधित
अधिकारिता भी है, समाप्त हो जाएगी तथा उक्त तारीख
को सपरिषद् हिज मेजेस्टी के समक्ष लम्बित सभी अपीलें
और अन्य कार्यवाहियां उच्चतम न्यायालय को अंतरित
कर दी जाएंगी और इसके द्वारा निपटाई जाएंगी।
(4) इस अनुच्छेद के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए संसद
विधि द्वारा और उपबंध कर सकेगी।
संविधान के 309. भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र सिविल, दांडिक और राजस्व उपबंधों के अधिकारिता वाले सभी न्यायालय और सभी न्यायिक, अधीन रहते कार्यपालक और अनुसचिवीय प्राधिकारी और अधिकारी हुए न्यायालयों, अपने-अपने कृत्यों को, इस संविधान के उपबंधों के प्राधिकारियों और अधीन रहते हुए, करते रहेंगे।
अधिकारियों का
कृत्य करते रहना 310. अनुच्छेद 217 के खंड (2) में किसी बात के होते हुए उच्च न्यायालयों भी, इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले किसी प्रांत के के न्यायाधीशों उच्च न्यायालय के पद धारण करने वाले न्यायधीश, यदि के बारे में वे अन्यथा निर्वाचन न कर चुके हो तो, ऐसे प्रारंभ पर उपबंध तत्स्थानी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हो
जाएंगे और तब ऐसे वेतनों और भत्तों तथा अनुपस्थिति
छुट्टी और पेंशन के संबंध में ऐसे अधिकारों के हकदार
होंगे जो ऐसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के संबंध में
अनुच्छेद 221 के अधीन उपबंधित हैं। (ऐसा न्यायाधीश
इस बात के होते हुए भी कि वह भारत का नागरिक नहीं
है, ऐसे उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति अथवा किसी
अन्य उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति या अन्य
न्यायधीश नियुक्त होने का पात्र होगा)।
संघ के अंनतिम 311. (1) जब तक इस संविधान के अधीन संसद के दोनों सदनों का विधानमंडल, सम्यक रुप से गठन नहीं हो जाता है और उन्हें प्रथम राष्ट्रपति आदि सत्र के लिए अधिवेशन के लिए आहूँत नहीं किया जाता