280 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
के बारे में उपबंध है भारत के डोमिनियन की संविधान तथा संसद को प्रदत्त
सभी शक्तियों का प्रयोग करेगी तथा उसे प्रदत्त कर्तव्यों
का पालन स्वयं करेगी और विशिष्टतया संसद के दोनों
सदनों का सम्यक गठन सुनिश्चित करने के लिए,
निर्वाचन-क्षेत्रों के परिसीमन समेत संसद के दोनों सदनों से
संबंधित या संसक्त सभी विषयों का तथा अन्य ऐसे
समनुषंगी तथा पारिणामिक विषयों का उपबंध करने
वाली विधि बना सकेगी जो इस संविधान के उपबंधों को
प्रभावी रुप देने के प्रयोजन के लिए आवश्यक समझे
जाएं।
स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजन के लिए भारतीय
डोमिनियन की संविधान सभा के अंतर्गत सभा द्वारा उसे
निमित्त बनाये गए नियमानुसार उस सभा में आकस्मिक
रिक्तियां भरने के लिए चुने गए सदस्य भी हैं किन्तु इसके
अंतर्गत किसी ऐसे राज्यक्षेत्र को जो पहली अनुसूची में
शामिल नहीं है, प्रतिनिधित्व करने वाले कोई सदस्य नहीं
हैं।
(2) संविधान सभा का, जब वह भारत शासन अधिनियम,
1935 के अधीन डोमिनियन विधानमंडल के रुप में
काम करता है_ अध्यक्ष इस अनुच्छेद के खंड (1) के
अधीन काम करने वाली ऐसी सभा के अध्यक्ष के रुप
में बना रहेगा।
* (3) ऐसे व्यक्ति को भारतीय डोमिनियन की संविधान सभा ने
इस निमित्त निर्वाचित किया होगा, तब तक भारत का
अंतिम राष्ट्रपति होगा जब तक संविधान के भाग 5 के
अध्याय 1 में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार राष्ट्रपति
निर्वाचित हो जाए और वह पद ग्रहण न कर ले।
* समिति के दो सदस्यों माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और श्री अल्लादी कृष्ण स्वामी अय्यर की राय है कि अनुच्छेद 311 के खंड के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाना चाहिए- ‘‘(3 भारत की संवधिन सभा का सभापति भारत का तत्कालिक राष्ट्रपति हो जाएगा जब तक कि संविधान के भाग 5 के अध्याय 1 के उपबंधों के अनुसार राष्ट्रपति का निर्वचन न हो जाए और वह पद ग्रहण न कर ले।)’’