2. मूल अधिकारों पर अन्तरिम रिपोर्ट - Page 30

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मूल अधिकारों पर अन्तरिम रिपोर्ट

* माननीय पं. हृदयनाथ कुंजरु ः .............. कि सरकार के सामने एक विकट समस्या है और अजीब बात है कि खंड 8 (ड.) में वर्तमान स्थिति का ध्यान नहीं रखा गया है। श्रीमान्, मेरे विचार में, यह अधिकार कुछ शर्तों के साथ ही दिया जा सकता है जिन्हें साफ तौर पर परिभाषित करना है।

डॉ. बी.आर.अम्बेडकर (बंगालः साधारण)ः मैं वक्ता के बीच में दखल देना नहीं चाहता लेकिन खंड 8 (ड.) पर चर्चा करते हुए वह सम्पूर्ण खंड की गलत छाप छोड़ रहे हैं।

डॉ. बी. पट्टाभि सीतारामय्या (मद्रासः साधारण)ः अपने मुद्दे को स्पष्ट करने के लिए दृष्टांत देने की बजाय वह गुणदोष का विवेचन कर रहे हैं।

माननीय पं. हृदयनाथ कुंजरुः एक सांसद के नाते, श्रीमान्, आप समझते हैं कि मैं क्या कर रहा हूँ। जहां तक डॉ. अम्बेडकर की आपत्ति का संबंध है मैं यह कहना चाहूँगा-और मुझे विश्वास है कि आप मुझे बर्दाश्त करेंगे- मैं परन्तुक सहित पूरा खण्ड पढ़कर सुनाता हूँः-

सभापतिः मैं सदस्य से अनुरोध करुंगा कि वह मुद्दे तक सीमित रहें जिसे वह स्पष्ट करना चाहते हैं और प्रस्ताव के गुणदोष पर न जाएँ।

* . सी.ए.डी. खंड, III, 29 अप्रैल, पृष्ठ 402।

खण्ड (ड.) इस प्रकार है - ऐसे युक्तियुक्त निर्बधन अधिरोपित करने के लिए जो लोक हित में

आवश्यक हों, अन्तर्गत अल्पसंख्यक समूहों तथा जन-जातियों का संरक्षण भी है, विधि द्वारा उपबंध

किया जा सकता है।

-‘‘संपादक’’