290 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
(2) पहली अनुसूची के भाग 3 में तत्समय विनिर्दिष्ट रियासतों को छोड़कर
भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर किसी भी उच्च न्यायालय के मुख्य संबंधी
अधिकार उन उपबंधों द्वारा यथास्थिति, शासित होंगे या शासित होते रहेंगे
जो ऐसे उच्च न्यायालय के ऐसे किसी न्यायाधीश को इस संविधान के
प्रारंभ से ठीक पहले लागू थे।
(3) इस पैरे के प्रयोग के लिए कोई व्यक्ति जो इस संविधान के प्रारंभ पर
तदर्थ न्यायाधीश कार्यकारी न्यायाधीश या अपर न्यायाधीश के रुप में
सेवारत था उस तारीख को ऐसे न्यायाधीश की हैसियत में सेवारत हुआ
समझा जाएगा, किन्तु तभी जब ऐसे तदर्थ न्यायाधीश, कार्यकारी न्यायाधीश
या अपर न्यायाधीश के रुप में उसकी सेवा न्यायाधीश के पद पर उसकी
पश्चात्वर्ती स्थायी नियुक्ति तक अविरल चलती रहती है। 13. इस भाग में जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) ‘‘मुख्य न्यायमूर्ति’’ पद के अंतर्गत कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति हैं
और ‘‘न्यायाधीश’’ पद के अंतर्गत तदर्थ न्यायाधीश हैं_
(ख) ‘‘वास्तविक सेवा’’ के अंतर्गत-
- न्यायाधीश द्वारा न्यायाधीश के रुप में कर्तव्य पालन में या ऐसे अन्य कृत्यों के
पालन में, जिनका राष्ट्रपति के अनुरोध पर उसने निर्वहन करने का भार अपने
ऊपर लिया है, बिताया गया समय है_
- उस समय को छोड़कर जिसमें न्यायाधीश छुट्टी लेकर अनुपस्थित है, दीर्घावकाश
है_ और
- उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय को या एक उच्च न्यायालय से दूसरे
उच्च न्यायालय को अंतरण पर जाने पर पदग्रहण-काल है।
भाग 5
भारत के महालेखापरीक्षक के बारे में उपबंध
- भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक को चार हजार रुपये प्रतिमास की दर से
वेतन का संदाय किया जाएगा।
- भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की अनुपस्थिति छुट्टी और पेंशन में अधि
कार उन उपबंधों से, यथास्थिति, शासित होंगे या शासित होते रहेंगे जो इस
संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले भारत के महालेखापरीक्षक को लागू थे और