तीसरी अनुसूची [अनुच्छेद 62(4), 81, 103(6), 144(2), 165 और 195] घोषणाओं के प्रारुप - Page 310

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उन उपबंधों में गवर्नर जनरल के प्रति सभी निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा

कि वे राष्ट्रपति के प्रति निर्देश हैं।

तीसरी अनुसूची

[ अनुच्छेद 62 (4), 81, 103 (6), 144 (2), 165 और 195 ]

घोषणाओं के प्रारुप

1.

संघ के मंत्री के लिए पद की शपथ का प्रारुपः

‘‘मैं अमुक.... सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ/ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारतीय संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, मैं संघ के मंत्री के रुप में अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करुंगा तथा मैं भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, सभी प्रकार के लोगों के प्रति संविधान और विधि के अनुसार न्याय करुंगा।’’

2.

संघ के मंत्री के लिए गोपनीयता की शपथ का प्रारुप

‘‘मैं अमुक.... सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता हूँ/ईश्वर की शपथ लेता हूँ कि विषय संघ के मंत्री के रुप मेरे विचार के लिए लाया जाएगा अथवा मुझे ज्ञात होगा उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को, तब के सिवाय जबकि ऐसे मंत्री के रुप अपने कर्तव्यों के सम्यक निर्वहन के लिए ऐसा करना अपेक्षित हो, मैं प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप से संसूचित या प्रकट नहीं करुंगा।’’

3.

संसद के सदस्य द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारुप

‘‘मैं अमुक ........जो राज्यसभा (या लोकसभा) का सदस्य-निर्वाचित (या नामनिर्देशित) हुआ हूँ, सत्यनिष्ठा से और निष्ठापूर्वक प्रतिज्ञा करता हूँ और घोषणा करता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूँ उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करुंगा।’’