292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
4.
उच्चतम न्यायालय के न्यायधीशों द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारुप
‘‘मैं (अमुक) ........जो भारत के उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति (या न्यायाधीश) (या भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक) नियुक्त हुआ हूँ, सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ और घोषणा करता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा तथा मैं सम्यक प्रकार से और श्रद्धापूर्वक तथा अपनी पूरी योग्यता, ज्ञान और विवेक से अपने पद के कर्तव्यों का भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और विधियों की मर्यादा बनाए रखूंगा।’’
5.
पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य के मंत्री के लिए पद की शपथ का प्रारुप
6.
पहली अनुसूची के भाग 1 में तत्समय विनिर्दिष्ट किसी राज्य के विधानमंडल के सदस्य द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारुप
7.
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की जाने वाली घोषणा का प्रारुप
‘‘मैं, आमुक......... उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति (न्या. न्यायाधीश) नियुक्त हुआ हूँ, सत्यनिष्ठा से और निष्ठापूर्वक वचन देता हूँ और घोषणा करता हूँ कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा तथा मैं सम्यक प्रकार से और श्रद्धापूर्वक तथा अपनी पूरी योग्यता, ज्ञान और विवेक से अपने पद के कर्तव्यों का भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना पालन करूंगा तथा मैं संविधान और विधियों की मर्यादा बनाए रखूंगा।’’
चौथी अनुसूची
[ अनुच्छेद 144(4 )]
पहली अनुसूची के भाग 1 के राज्यों के राज्यपालों के लिए अनुदेश
- इन अनुदेशों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हों, ‘‘राज्यपाल’’
शब्द के अंतर्गत वह हर व्यक्ति होगा जो इस संविधान के उपबंधों के अनुसार
तत्समय के कृयों का निर्वहन कर रहा है।