पांचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 189 (क) और 190(1)] अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्राण के बारे में उपबंध - Page 312

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  1. अपनी मंत्री परिषद की नियुक्ति करने में राज्यपाल निम्नलिखित रीति से अपने

मंत्री चुनने के लिए अपना भरसक प्रयास करेगा अर्थात् उस व्यक्ति के परामर्श

से जो उसके निर्णय में, जो विधानमंडल में एक स्थिर बहुमत बनाये रखने

के लिए सबसे अधिक संभाव्य हैं उन व्यक्तियों को (यथासाध्य महत्वपूर्ण

अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों समेत) नियुक्त करना जो विधानमंडल का

विश्वास सामूहिक रुप से पाने में सबसे अच्छी स्थिति में होंगे। ऐसा करते समय

वह मंत्रियों में संयुक्त उत्तरदायित्व की भावना पोषित करने की आवश्यकता

का बराबर ध्यान में रखेगा।

  1. उन कृत्यों से संबंधित विषयों के सिवाय जिनमें इस संविधान के द्वारा या

के अधीन उसने अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करना अपेक्षित है, राज्य की

कार्यपालिका शक्ति की परिधि के भीतर आने वाले सभी विषयों में राज्यपाल,

उसे प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, अपने मंत्रियों की सलाह से मार्गदर्शित

होगा।

  1. राज्यपाल अच्छे प्रशासन के मानदंड कायम रखने के लिए नैतिक, सामाजिक

और आर्थिक कल्याण हेतु तथा सार्वजनिक जीवन और राज्य के शासन में

अपना उचित हिस्सा पाने के लिए जनता के सब वर्गों को दुरुस्त रखने के

लिए सब उपायों को बढ़ावा देने के लिए और सब वर्गों में और संप्रदायों में

सहयोग, सदभावना और धार्मिक आस्थाओं तथा भावनाओं के लिए परस्पर आदर

सुनिश्चित करने के लिए भरसक यत्न करेगा।

पांच वी अनुसूची

[ अनुच्छेद 189 (क) और 190(1) ]

अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के

बारे में उपबंध

भाग 1

साधारण

  1. अनुसूचित क्षेत्रों में किसी राज्य की कार्यपालिका शक्तिः इस अनुसूची के

उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार

इसके अनुसूचित क्षेत्र पर है।

  1. अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा

प्रतिवेदनः ऐसे प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, जिसमें अनुसूचित क्षेत्र हैं, प्रतिवर्ष

या जब भी राष्ट्रपति इस प्रकार अपेक्षा करें, इस राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों के