पांचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 189 (क) और 190(1)] अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्राण के बारे में उपबंध - Page 313

294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

प्रशासन के संबंध में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देगा अैर संघ की कार्यपालिका शक्ति

का विस्तार राज्य को उक्त क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में निर्देश देने तक होगा।

भाग 2

मद्रास, बम्बई, पश्चिम बंगाल, बिहार मध्यप्रांत और बरार तथा उड़ीसा के बारे में उपबंध

  1. भाग 2 का लागू होनाः इस भाग के उपबंध मद्रास, बम्बई, पश्चिमी बंगाल,

बिहार, मध्यप्रांत तथा उड़ीसा के लिए लागू होंगे।

  1. जनजाति सलाहकार परिषदः

(1) इस संविधान के प्रारंभ के पश्चात् यथाशीघ्र मद्रास, बम्बई, पश्चिमी बंगाल,

बिहार, मध्यप्रांत और बरार तथा उड़ीसा में जनजाति सलाहकार परिषद स्थापित

की जाएगी जिसमें कम से कम 10 और अधिक से अधिक 25 सदस्य होंगे

जिनमें निकटतम तीन-चौथाई सदस्य राज्य की विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों

के निर्वाचित प्रतिनिधि होंगे।

(2) जनजाति सलाहकार परिषद का यह कर्तव्य होगा कि वह अनुसूचित क्षेत्र यदि

कोई है, के प्रशासन तथा राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण से संबंधित

सभी विषयों पर सरकार को साधारणतया सलाह दें।

(3) राज्यपाल निम्नलिखित के निर्धारण पक्ष विनियमन के लिए नियम बना सकता

है-

(क) परिषद के सदस्यों की संख्या के, उनकी नियुक्ति की और परिषद के

अध्यक्ष तथा उसके अधिकारियों और सेवकों की नियुक्ति की रीति

को_

(ख) उसके अधिवेशनों के संचालन तथा साधारणतया उसकी प्रक्रिया को_

और

(ग) राज्य में पदाधिकारियों और स्थानीय निकायों के संबंध। (घ) अन्य सभी आनुषंगिक विषयों को,

यथास्थिति, विहित या विनियमित करने के लिए नियम बना सकेगा।

  1. अनुसूचित क्षेत्रों को लागू विधि-

(1) यदि राज्यपाल को राज्य की जनजाति सलाहकार परिषद द्वारा सलाह दी जाए

तो वह लोक अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकेगा कि संसद का या उस राज्य के

विधान मंडल का कोई विशिष्ट अधिनियम उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्र या

उसके किसी भाग को लागू नहीं होगा अथवा उस राज्य के अनुसूचित क्षेत्र या

उसके किसी भाग को ऐसे अपवादों और उपांतरों के अधीन रहते हुए लागू होगा