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जो वह अधिसूचना में उक्त परिषद के अनुमोदन से, विनिर्दिष्ट करेंः
परंतु जहां ऐसा अधिनियम निम्नलिखित विषयों में से किसी विषय के संबंध
में है-
(क) विवाह,
(ख) सम्पत्ति की विरासत,
(ग) जनजातियों की सामाजिक प्रथाएं,
(घ) उन भूमियों से भिन्न भूमि जो भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अधीन या
प्रश्नगत क्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन आरक्षित वन हैं,
जिसके अंतर्गत अधिकारियों के अधिकार, भू-आवंटन तथा किसी प्रयोजन के
लिए भूमि का आरक्षण भी हैं।
(ड.) ग्राम प्रशासन से संबंधित कोई विषय जिसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों की
स्थापना भी है, वहां राज्यपाल जनजाति सलाहकार परिषद की सलाह पर ऐसा
निर्देश जारी करेगा।
(2) राज्यपाल राज्य की जनजाति सलाहकार परिषद से परामर्श करके, किसी भी
विषय के संबंध में जो ऐसे क्षेत्र में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा उपबंधित
नहीं है, राज्य में किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के लिए विनियम बना सकेगा। (3) राज्यपाल उन अपराधों से भिन्न जो मृत्यु, आजीवन निर्वासन अथवा पांच वर्ष
या इससे अधिक के कारावास से दंडनीय है, अपराधों से संबंधित अथवा ऐसी
किसी विधि से जो ऐसे विनियमों में परिश्चित की जाए, उत्पन्न होने वाले
विवादों से भिन्न विवादों से संबंधित मामलों के विचारण की बाबत राज्य में
किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के लिए विनियम भी बना सकेगा, तथा ऐसे विनियमों
द्वारा, ऐसे किसी क्षेत्र में प्रधान या पंचायतों को ऐसे मामलों का विचार करने
के लिए सशक्त कर सकेगा।
(4) जब इस पैरे के अधीन बनाए गए कोई विनियम राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित कर
दिए जाएं तो उनका वही बल और प्रभाव होगा जो समुचित विधानमंडल के
किसी अधिनियम का होता है जो ऐसे में लागू है और उस विधानमंडल को इस
संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के फलस्वरुप अधिनियमित किया गया है।
- अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातियों से भिन्न लोगों को भूमि का अन्य संक्रमण तथा आवंटन
(1) अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के लिए किसी अनुसूचित क्षेत्र में कोई
भूमि किसी ऐसे व्यक्ति को अंतरित करना विधिपूर्ण नहीं होगा जो जनजाति
का सदस्य नहीं है।
(2) राज्य में निहित अनुसूचित क्षेत्र में कोई भूमि, जिसके भीतर ऐसा क्षेत्र स्थित
है, ऐसे किसी व्यक्ति को राज्यपाल द्वारा राज्य की जनजाति सलाहकार परिषद
के परामर्श से उस निमित बनाये गए नियमों के अनुसार सलाहकार परिषद के