पांचवीं अनुसूची [अनुच्छेद 189 (क) और 190(1)] अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्राण के बारे में उपबंध - Page 316

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पर लागू होंगे।

  1. अनुसूचित क्षेत्र सलाहकार समितिः (1) इस संविधान के प्रारंभ के बाद यथाशीघ्र राज्यपाल राज्य के लिए आदेश द्वारा एक अनुसूचित क्षेत्र सलाहकार समिति नियुक्त कर सकेगा जिसके दो-तिहाई सदस्य अनुसूचित जनजाति के होंगे। ऐसे आदेश में समिति की रचना, शक्तियां और प्रक्रिया परिनिश्चित की जा सकेगी ताकि ऐसे आनुषांगिक या समनुषंगी उपबंध अंतर्विष्ट हो सकेंगे जो राज्यपाल द्वारा आवश्यक या वांछनीय समझे जाएं।

  2. कुछ मामलों में विनियम बनाने की राज्यपाल की शक्तिः

(1) राज्यपाल, उन अपराधों से जो मृत्यु, आजीवन निर्वासन या पांच वर्ष या

उससे अधिक की अवधि की कारावास से दंडनीय हैं, संबंधित मामलों

के विचारण के संबंध में अथवा घनीय मूल्य के वादों या मामलों के

ऐसे वर्गों के विचारण के लिए जो ऐसे विनियमों में विनिर्दिष्ट किए

जाएं, राज्य में किसी अनुसूचित क्षेत्र के लिए विनियम बना सकेगा,

तथा ऐसे विनियमों द्वारा किसी क्षेत्र में मुखिया या पंचायत को ऐसे

वादों या मामलों का विचारण करने के लिए सशक्त कर सकेगा।

(2) राज्यपाल विनियम भी बना सकेगा जिससे कि राज्य में किसी अनुसूचित

क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा किसी व्यक्ति को

भी अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है किसी भूमि का हस्तांतरण

प्रतिषिद्ध कर सकेगा।

(3) इस पैरा के अधीन बनाये गए कोई विनियमों का जब वे राज्यपाल

द्वारा प्रख्यापित कर दिये जाएं, वही बल और प्रभाव होगा जो समुचित

विधानमंडल के किसी अधिनियम का। ऐसे क्षेत्र में लागू हैं, होता

है, और इस संविधान द्वारा उस विधान मंडल के प्रदत्त शक्तियों के

फलस्वरुप अधिनियमित किया गया है।

  1. अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय वार्षिक वित्तीय विवरण से अलग से दर्शाए जाएंगे ः राज्य में अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय जो राज्य के राजस्व में जमा की जाएंगी और उसमें से पूरा किया जाएगा राज्य में वार्षिक वित्तीय विवरण में अलग से दर्शाए जाएंगे जो इस संविधान के अनुच्छेद 177 के अधीन राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।