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(क) जिला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों की संरचना तथा उसमें स्थानों का
आवंटन_
(ख) उन परिषदों के लिए निर्वाचनों के प्रयोजन के लिए निर्वाचित-क्षेत्रों का
परिसीमन_
(ग) ऐसे निर्वाचनों में मतदान के लिए अहर्तताएं और उनके लिए निर्वाचक
नामावलियों की तैयारी_
(घ) ऐसे निर्वाचनों में ऐसी परिषदों के सदस्य निर्वाचित होने के लिए
अर्हताएं_
(ड़) ऐसी परिषदों के निर्वाचन या नामनिर्देशन से संबंधित या संसक्त कोई
अन्य विषय_
(च) जिला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों में कार्य की प्रक्रिया और संचालन_
(छ) जिला और प्रादेशिक परिषदों के अधिकारियों और कर्मचारियों की
नियुक्ति।
(8) जिला और प्रादेशिक परिषदें प्रथम गठन के पश्चात् इस पैरे के उपपैरा (7) में
विनिर्दिष्ट विषयों के बारे में नियम बना सकेगी तथा निम्नलिखित को विनियमित
करने वाले नियम भी बना सकेगीः-
(क) अधीनस्थ स्थानीय परिषदों और बोर्डों का निर्माण तथा उनकी कार्य प्रक्रिया
और उनका कार्य संचालन_ और
(ख) यथास्थिति, जिला या प्रदेश के प्रशासन से संबंधित कामकाज संबंधी
साधारणतया सभी विषयः
परंतु जब तक जिला या प्रादेशिक परिषद द्वारा इस उप पैरा के अधीन नियम नहीं बनाए जाते हैं तब तक इस पैरा के उपपैरा (7) के अधीन राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियम, ऐसी प्रत्येक परिषद के निर्वाचनों, उसके अधिकारियों और कर्मचारियों तथा उसकी प्रक्रिया और उसके संचालन के संबंध में प्रभावी होंगेः
परंतु यह कि मिकिर और उत्तरी कोचीन पहाडि़यों का यथास्थिति, उपायुक्त या उपखंड अधिकारी इस अनुसूची के पैरा 19 से संलग्न सारणी के भाग 1 की क्रमशः मद 5 और 6 के अंतर्गत शामिल राज्य-क्षेत्रों के संबंध में जिला परिषद का पदेन अध्यक्ष (चेयरमैन) होगा और उसे, राज्यपाल के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, जिला परिषद के किसी संकल्प या विनिश्चय को अकृत करने या उपांतरित करने या जिला परिषद को ऐसे अनुदेश जैसे वह समुचित समझे जारी करने की शक्ति जिला परिषद के प्रथम गठन के पश्चात् छह वर्ष की अवधि तक रहेगी तथा जिला परिषद जारी किए गए ऐसे प्रत्येक अनुदेश का अनुपालन करेगी।