छठी अनुसूची [अनुच्छेद 189 (ख) और 190 (2)] - Page 323

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

  1. विधि बनाने की जिला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों की शक्ति- (1) स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक परिषद को ऐसे प्रदेश के भीतर के सभी क्षेत्रों

के संबंध में और स्वशासी जिले की जिला परिषद को ऐसे क्षेत्रों को छोड़कर

जो उस जिले के भीतर की प्रादेशिक परिषदों के, यदि कोई हो, प्राधिकार के

अधीन है, उस जिले के भीतर के अन्य सभी क्षेत्रों के संबंध में निम्नलिखित

विषयों के लिए विधि बनाने की शक्ति होगी, अर्थात्ः-

(क) किसी आरक्षित वन भूमि से भिन्न भूमि का कृषि या चारागाह के

प्रयोजनों के लिए अथवा निवास के या कृषि से भिन्न अन्य प्रयोजनों

के लिए अथवा किसी ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए जिससे किसी ग्राम

या नगर के निवासियों के हितों की अभिवृद्धि संभव है, आवंटन, अधि

भोग या उपयोग अथवा अलग रखा जानाः

परंतु ऐसी विधियों की कोई बात, असम राज्य की सरकार को अनिवार्य अर्जन

प्राधिकृत करने वाली तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार किसी भूमि का चाहे

वह अधिभोग में हो या नहीं_ लोक प्रयोजनों के लिए अनिवार्य अर्जन करने में

निवारित नहीं करेगी_

(ख) किसी ऐसे वन का प्रबंध जो आरक्षित वन नहीं है_

(ग) कृषि के प्रयोजन के लिए किसी नहर या जल-प्रवाह का उपयोग_

(घ) झूम की पद्धति का परिवर्ती खेती अन्य पद्धतियों का विनियमन_

(ड़) ग्राम या नगर समितियों या परिषदों की स्थापना और उनकी शक्तियां_ (च) ग्राम या नगर प्रशासन से संबंधित को अन्य विषय जिसके अंतर्गत ग्राम या नगर पुलिस और लोक स्वास्थ्य और स्वच्छता है_

(छ) प्रमुखों या मुखियाओं की नियुक्ति या उत्तराधिकार_

(ज) सम्पत्ति का विरासत_

(झ) विवाह_

(×ा) सामाजिक रुढि़यां।

(2) इस पैरा में ‘‘आरक्षित वन’’ से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत हैं जो असम वन विनियम 1891 के अधीन या प्रश्नगत क्षेत्र में तत्समय प्रवृत किसी अन्य विधि के अधीन आरक्षित है।

  1. स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों में न्याय प्रशासन - (1) स्वशासी प्रदेश की प्रादेशिक परिषद् ऐसे प्रदेश के भीतर के क्षेत्रों के संबंध