छठी अनुसूची [अनुच्छेद 189 (ख) और 190 (2)] - Page 329

310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

(2) इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन दिया गया कोई निर्देश इस प्रकार दिया जा सकेगा कि उसका भूतलक्षी प्रभाव हो।

  1. स्वशासी जिलों से संबंधित प्राक्कलित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक वित्तीय विवरण में प्रथम रुप से दिखाया जाना- किसी स्वशासी जिले से संबंधित प्राप्तियां और व्यय जो असम राज्य के राजस्व में जमा होनी हैं, या उसमें से किए जाने हैं, इस संविधान के अनुच्छेद 177 के अधीन राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखे जाने वाले वार्षिक विवरण में पृथक रुप से दिखाए जाएंगे।

  2. स्वशासी जिले के प्रशासन की जांच करने और उस पर रिपोर्ट देने के लिए आयोग की नियुक्ति-

(1) राज्यपाल, राज्य में स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों के प्रशासन के संबंध

में अपने द्वारा विनिर्दिष्ट किसी विषय की, जिसके अंतर्गत इस अनुसूची के पैरा

1 के उपपैरा (3) के खंड (ग), खंड (घ), खंड (ड़) और खंड (च) में

विनिर्दिष्ट विषय हैं, जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने के लिए किसी भी

समय आयोग नियुक्त कर सकेगा, या राज्य में स्वशासी जिलों और स्वशासी

प्रदेशों के साधारणतया प्रशासन की ओर विशिष्टतया-

(क) ऐसे जिले और प्रदेशों में शिक्षा और चिकित्सा की सुविधाओं की ओर

संचार की व्यवस्था की,

(ख) ऐसे जिलों और प्रदेशों के संबंध में किसी नए या विशेष विधान की

आवश्यकता की, और

(ग) जिला परिषदों और प्रादेशिक परिषदों द्वारा बनाई गई विधियों, नियमों

और विनियमों के प्रशासन की,

समय-समय पर जांच करने और उस पर प्रतिवेदन देने के लिए आयोग नियुक्त कर सकेगा और ऐसे आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चित कर सकेगा।

(2) संबंधित मंत्री, प्रत्येक ऐसे आयोग के प्रतिवेदन को, राज्यपाल की उससे

संबंधित सिफारिशों के साथ, उस पर राज्य की सरकार द्वारा की जाने के लिए

प्रस्तावित कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकारक ज्ञापन सहित, राज्य के विधानमंडल

के समक्ष रखेगा।

(3) राज्यपाल राज्य की सरकार के कार्य का अपने मंत्रियों में आवंटन करते समय

मंत्रियों में से एक मंत्री को राज्य के स्वशासी जिलों और स्वशासी प्रदेशों के

कल्याण का विशेषतया भारसाधक बना सकेगा।