छठी अनुसूची [अनुच्छेद 189 (ख) और 190 (2)] - Page 330

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  1. जिला और प्रादेशिक परिषदों के कार्यों और संकल्पों को रद्द या निलम्बित किया जाना-

(1) यदि राज्यपाल को किसी समय यह भान हो जाता है कि जिला परिषद या

प्रादेशिक परिषद के किसी कार्य या संकल्प से भारत की सुरक्षा में संकट उत्पन्न

होना संभाव्य है या लोक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभाव्य है तो वह

ऐसे कार्य या संकल्प को निष्प्रभाव या निलंबित कर सकेगा और उसके द्वारा

प्रयोक्तव्य सभी या किन्हीं शक्तियों को अपने हाथ में ले लेना है, कर सकेगा

जो वह ऐसे कार्य को किए जाने या उसके चालू रखे जाने का अथवा ऐसे

संकल्प को प्रभावी किए जाने का निवारण करने के लिए आवश्यक समझे।

(2) राज्यपाल द्वारा इस पैरा के उपपैरा (1) के अधीन किया गया आदेश, उसके

लिए जो कारण हैं उनके सहित, राज्य के विधानमंडल द्वारा समक्ष यथासंभव

शीघ्र रखा जाएगा और यदि वह आदेश, राज्य के विधानमंडल द्वारा प्रतिसंहृत

नहीं दिया जाता है तो वह उस तारीख से, जिसको वह इस प्रकार किया गया

था, बारह मास की अवधि तक प्रवृत्त बना रहेगाः

परंतु यदि और जितनी बार, ऐसे आदेश को प्रवृत्त बनाए रखने का अनुमोदन करने वाला संकल्प राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित कर दिया जाता है और उतनी बार यह आदेश, यदि राज्यपाल द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता है तो, उस तारीख से जिसको वह इस पैरा के अधीन अन्यथा प्रवर्तन में नहीं रहता, बारह मास की और अवधि तक प्रवृत्त बना रहेगा।

(3) इस पैरा के अंतर्गत राज्यपाल के कार्य उसके द्वारा उसके निर्देश से किए जाएंगे।

  1. जिला परिषद और प्रादेशिक परिषद का विघटन- राज्यपाल, इस अनुसूची के पैरा 14 के अधीन नियुक्त आयोग की सिफारिश पर, लोक अधिसूचना द्वारा, किसी जिला परिषद या प्रादेशिक परिषद का विघटन कर सकेगा, और-

(क) निर्देश दे सकेगा कि परिषद् के पुनर्गठन के लिए नया साधारण निर्वाचन

तुरंत कराया जाए_ या

(ख) राज्य के विधानमंडल के पूर्व अनुमोदन से ऐसी परिषद के प्राधिकार

के अधीन आने वाले क्षेत्र का प्रशासन बारह मास से अधिक अवधि

के लिए अपने हाथ में ले सकेगा अथवा ऐसे क्षेत्र का प्रशासन ऐसे

आयोग को जिसे उक्त पैरा के अधीन नियुक्त किया गया है या अन्य

ऐसे किसी निकाय को जिसे वह उपयुक्त समझता है, उक्त अवधि के