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खंड 17
* माननीय सरदार वल्लभभाई पटलेः श्रीमान्, मैं खण्ड 17 पेश करता हूँः
‘‘उत्पीड़न या असम्यक् असर द्वारा किया गया एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन विधि द्वारा मान्य नहीं होगा।’’
श्री के.एम. मुंशीः श्रीमान्, मैं निम्नलिखित संशोधन पेश करने की प्रार्थना करता हूँः-
‘‘खण्ड 17’’ के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड रखा जाएगाः-
‘‘कपट, उत्पीड़न या असम्यक असर द्वारा किसी भी व्यक्ति का अथवा 18 वर्ष से कम आयु के अवयस्क का एक धर्म से दूसरे धर्म में संपरिवर्तन विधि द्वारा मान्य नहीं होगा।’’
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# डॉ. बी.आर.अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं अफसोस के साथ कहता हूँ कि मैं अवयस्क बालक के धर्म परिवर्तन के बारे में भी मुंशी के संशोधन से सहमत नहीं हूँ। यह खण्ड, वर्तमान रूप में, सदन पर संभवतः यह छाप छोड़ता है कि अवयस्कों के धर्म परिवर्तन के सवाल पर मूल अधिकारों की समिति द्वारा या अल्पसंख्यक उपसमिति द्वारा या सलाहकार समिति द्वारा विचार नहीं किया गया था। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूँगा कि इस सवाल पर अच्छा-खासा विचार-विमर्श किया गया था और इसके हर पहलू पर बारीकी से विचार किया गया था। इस सम्पूर्ण सवाल पर सभी पहलुओं से विचार करने के पश्चात् और आने वाली कठिनाइयों पर दृष्टिपात करने के बाद ही सलाहकार समिति इस नतीजे पर पहुंची थी कि उन्हें यह खंड वर्तमान रुप में ही ध्यान में रखना चाहिए।
श्रीमान्, यह कठिनाई मेरे मस्तिष्क में इतनी स्पष्ट है कि मुझे भी मुंशी से संशोधन को छोड़ने का अनुरोध करने के सिवाय दूसरा कोई रास्ता दिखाई नहीं पड़ता।
जहां तक बालकों का संबंध है, तीन संभावित स्थितियां हो सकती हैं जिन्हें पहले से देखा जा सकता है। पहली, स्थिति उन बालकों की है जो अपने माता-पिता और अभिभावकों के साथ रहते हैं। दूसरे वे बालक हैं जो अनाथ हैं जिनके कानूनी अर्थ में कोई माता-पिता और अभिभावक नहीं हैं। मान लीजिए आपके पास 18 साल से
* . सी.ए.डी. खंड III, 1 मई, 1947, पृष्ठ 488 ।
# सी.ए.डी. खंड III, 1 मई, 1947, पृष्ठ 501-2 ।