17
यह कृत्य विधि की दृष्टि में अपराध माना जाएगा? दूसरा मामला लीजिए, मान लीजिए धर्म परिवर्तन करने वाले पिता की एक पुत्री है। वह पुत्री का विवाह ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार करता है तो इस विवाह के क्या परिणाम निकलेंगे? वह विवाह कानूनी होगा या गैरकानूनी?
यदि आप नहीं चाहते कि बालकों का धर्म परिवर्तन हो तो आपको संरक्षत्व के बारे में किसी अन्य प्रकार की विधि बनानी होगी ताकि माता-पिताओं को अपने बालकों के धार्मिक जीवन को प्रभावित करने और एक आकार प्रदान करने के उनके अधिकारों के प्रयोग करने से रोका जा सके। श्रीमान्, मैं यह पूछना चाहूँगा, उदाहरण के लिए पांच वर्षीय बालक को मात्र इसलिए उसके माता-पिता से पृथक कर दिया जाए कि माता-पिता ने ईसाई धर्म या दूसरा कोई धर्म ग्रहण कर लिया है जो मूलतः उनका धर्म नहीं था। ऐसी स्थिति में क्या इस सदन के लिए यह स्वीकार करना संभव होगा। मैं इन कठिनाइयों का उल्लेख यह दर्शाने के लिए कर रहा हूँ कि मूल अधिकारों की समिति, अल्पसंख्यक समिति और सलाहकार समिति के सामने ये कठिनाइयां आई थीं और इन्हीं के कारण उन्हें इस प्रस्ताव को अस्वीकार करना पड़ा था। चूंकि हमने यह महसूस किया कि इस प्रस्ताव की स्वीकृति कि 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को धर्म परिवर्तन नहीं करने दिया जाएगा, अनेक रुकावटों को, अनेक कुपरिणामों को जन्म देगी। इसलिए हमने सोचा कि इसको सर्वथा छोड़ देना ही बेहतर होगा (सुनिये, सुनिये) मात्र यह तथ्य कि हमने मूल अधिकारों के खंड 17 में ऐसा कोई उल्लेख नहीं किया है। मेरे निर्णय में, विधानमंडल को, इस विषय को विनियमित करने की दृष्टि से कोई कानून बनाने से उस समय निवारित नहीं करता जब वह प्रवर्तनशील हो जाता है।
इसलिए मेरा निवेदन है कि इस खण्ड को वापस समिति के आगे विचार के लिए भेजने से कोई बेहतर परिणाम नहीं निकलेंगे। मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं है कि वे लोग इस पर आगे विचार करें जो इसके बारे में अन्यथा महसूस करते हैं। किन्तु मैं यह कहना चाहता हूँ कि तीनों समितियों ने इस विषय पर अपना पूरा ध्यान दिया है। अतः मेरा निष्कर्ष है कि मामले की सम्पूर्ण परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सबसे बढि़या उपाय खण्ड को सर्वथा छोड़ना होगा। मुझे ऐसा उपबंध किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है कि जिन बालकों के कानूनी और विधिपूर्ण अभिभावक हैं उनका धर्म परिवर्तन उनके माता-पिता की जानकारी के बिना नहीं किया जाना चाहिए। मेरे विचार में इस मामले में इतना ही करना पर्याप्त होगा।
¹यह खण्ड वापस सलाहकार समिति को भेजा गया-संपादकह्
*****