18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
खंड 18-संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार
* माननीय सरदार वल्लभभाई पटेलः अब मैं खण्ड 18 पेश करता हूँः
‘‘(1) प्रत्येक इकाई के अल्पसंख्यकों की उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति की
बाबत संरक्षा की जाएगी, और ऐसी विधियां अथवा विनिमय नहीं बनाये
जा सकते, जो इस बाबत प्रपीड़क अथवा प्रतिकूल रुप से प्रवर्तित हों।
(2) किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग के साथ राजकीय शिक्षा संस्थाओं में प्रवेश
के बारे में विभेद नहीं किया जाएगा, और न ही कोई धार्मिक शिक्षा उन
पर अनिवार्य होगी।
(3) (क) धर्म, संप्रदाय या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक अपनी
रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन के लिए स्वतंत्र
होंगे।
(ख) विद्यालयों को राजकीय सहायता देते समय राज्य अल्पसंख्यक
वर्गों के प्रबंध में चलने वाले विद्यालय के साथ धर्म, संप्रदाय या भाषा
के आधार पर विभेद नहीं करेगा। मैं सदन की स्वीकृत के लिए इस
खण्ड को पेश करता हूँ।’’
श्री मोहनलाल सक्सेना (संयुक्त प्रांतः साधारण)ः श्रीमान् आपकी अनुमति से मैं यह प्रस्ताव रखना चाहूँगा कि यह खण्ड वापस सलाहकार समिति के पास पुनर्विचार के लिए भेजा जाए। कुछ ऐसे पहलू हैं जो पुनः विचारणीय हैं। ऐसी स्थिति में यही ज्यादा बेहतर होगा कि यह पूरा खण्ड ही सलाहकार समिति के पास पुर्नविचार के लिए भेजा जाए।
सभापतिः श्री मोहनलाल सक्सेना का प्रस्ताव है कि इस खण्ड को वापस सलाहकार समिति के पास और आगे विचार के लिए भेजा जाए।
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** श्री के.एम. मुंशीः मेरा प्रस्ताव है कि खण्ड 18 का उपखंड (2) वापस सलाहकार समिति को भेजा जाए। बहुत से सदस्यों की यह आम भावना है कि इस खण्ड पर, सदन में हुई चर्चा के प्रकाश में, फिर से विचार किया जाना चाहिए।
*** डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति महोदय, मैं यह मानता हूँ कि मैं श्री मुंशी एवं
****** . . . सी.सी.डी. खंड सी.ए.डी. खंड सी.ए.डी. खंड IIIIIIIII, 1 मई, 1947 पृष्ठ 503 ।, 1 मई, 1947 पृष्इ 501-2 ।, 1 मई, 1947 पृष्ठ 503।