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संघीय संविधान समिति की रिपोर्ट
खण्ड 3
श्री के.एम. मुंशीः मेरा प्रस्ताव है कि मूल खण्ड के स्थान पर निम्नलिखित खंड रखा जाएः
‘‘संघ में और उसके क्षेत्राधिकार के अधीन ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसके माता-पिता में से कोई जन्म के समय संघ का नागरिक था, और संघ में देशीयकृत प्रत्येक व्यक्ति संघ का नागरिक होगा।
संघीय नागरिकता अर्जित करने या समाप्त करने से संबंधित आगे उपबंध संघ की विधि द्वारा किया जा सकेगा।’’
इसके कारण तदर्थ समिति की रिपोर्ट में पूरी तरह पहले ही दिए जा चुके हैं। मुझे इससे अधिक कुछ नहीं कहना।
श्री के. संथानमः श्रीमान्, मेरा प्रस्ताव है कि इस खण्ड के प्रथम पैरे के अन्त में निम्नलिखित को जोड़ दिया जाएः
‘‘संघ के प्रारंभ के पूर्व ओर उसके क्षेत्राधिकार के अधीन भारत में जन्मा और देशीयकृत प्रत्येक व्यक्ति संघ का नागरिक होगा।’’
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* डॉ. बी.आर.अम्बेडकरः (बम्बई साधारण)ः सभापति महोदय, मैं समझता हूँ कि इस बारे में कोई संदेह नहीं हो सकता कि श्री संथानम द्वारा उठाया गया मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस बात को गंभीरता से लेना होगा। यदि समिति द्वारा प्रारुपित
खण्ड का पहला वाक्य ही पढ़ लिया जाए तो जो कठिनाई पैदा हुई है, वह आसानी से देखी जा सकती है। प्रारुप का कहना है-‘‘संघ में जन्मा प्रत्येक व्यक्ति’’ प्रकट है कि संकेत भविष्य की ओर है, उनकी ओर है जो संघ के निर्माण के बाद संघ में जन्म लेंगे। सवाल यह है कि उन लोगों की क्या स्थिति होगी जो भारत में जन्मे हैं किन्तु संघ के अस्तित्व में आने से पूर्व जन्मे हैं। मेरे निर्णय में इस स्थिति को भी शामिल करने के लिए हमें एक दूसरा खण्ड शामिल करना होगा। मैं संशोधन का सुझाव नहीं दे रहा हूँ मैं एक ख्याल प्रस्तुत कर रहा हूँ। नया खण्ड इस प्रकार होगा-
‘‘साधारण खण्ड अधिनियम में परिभाषित रूप में भारत में जन्मे सभी व्यक्ति जो भारत
* सी.ए.डी. खंड III, 2 मई, 1947, पृष्ठ 526 ।