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खण्ड 24
[*] माननीय सर एन. गोपालस्वामी अय्यंगरः श्रीमान्, मैं खण्ड-24 पेश करता हूँ ः
‘‘इस संविधान के अधीन परिसंघ या प्रांतों के लिए कराये जाने वाले सभी निर्वाचनों
का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण जिसके अन्तर्गत ऐसे निर्वाचनों के संबंध में या
उनसे उत्पन्न आशंकाओं तथा विवादों के विनिश्चय के लिए निर्वाचन अधिकरणों
की नियुक्ति भी है, एक आयोग में निहित होगी जो राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया
जाएगा।’’
श्रीमान्, इस खण्ड का उद्देश्य यथासंभव यह सुनिश्चित करना है कि देश में परिसंघ के या प्रांतों के निर्वाचन निष्पक्ष रीति से संचालित हों। इसके पीछे विचार राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक आयोग स्थापित करना है जिसके तत्वाधान में निर्वाचन कार्यकलाप के ये सभी पहलू और निर्वाचनोत्तर कार्यकलाप विनियमित और नियंत्रित किए जाएंगे।
** डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः (बुम्बईः साधारण)ः उपसभापति जी, मेरे विचार में यह वांछनीय होगा कि मैं सदन के समक्ष इस खण्ड की उत्पत्ति का उल्लेख करूं।
यद्यपि यह खंड संविधान में आया है जो संघ के बारे में है, फिर भी वास्तविकता यह है कि इस पर मूल अधिकार समिति द्वारा विचार किया गया था। उस समिति का निष्कर्ष था कि यदि चुनाव समकालीन कार्यपालिका के ढांचों में सौंप दिए गए तो अल्पसंख्यकों के बारे में या चुनावों के बारे में कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। बहुत सारे लोग यह महसूस करते हैं कि यदि चुनाव कार्यपालक पदाधिकारी के अधीन संचालित किए गए और यदि कार्यपालक प्राधिकारी के पास, किसी अभ्यर्थी विशेष के लिए जो सत्तारूढ़ पार्टी को प्रिय है या समकालीन सरकार को प्रिय है समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से अधिकारियों को एक जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरित करने की शक्ति हुई, जो कि उसके पास अवश्य होनी चाहिए जो उससे निश्चय ही स्वतंत्र निर्वाचन दूषित हो जाएगा। इसलिए मूल अधिकार समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह हल निकाला कि निर्वाचन की विशुद्धता के लिए, निर्वाचन में निष्पक्षता के लिए सबसे बड़ा रक्षोपाय इस विषय को कार्यपालक प्राधिकारी से लेकर किसी स्वतंत्र प्राधिकारी को सौंपना है। यद्यपि
खण्ड 23 में विनिर्दिष्ट रूप से उस स्कीम का विस्तृत उल्लेख नहीं है जिस पर मूल अधिकार समिति में विचार किया गया था। मैं सदन को बताना चाहूँगा कि जो स्कीम *** मूल अधिकार समिति के सदस्यों के मन में थी वह यह थी कि पूरे भारत में चुनाव . सी.ए.डी. खंड सी.ए.डी. खंड 44, 29 जुलाई, 1947, पृष्ठ 915।, 29 जुलाई, 1947, पृष्ठ 917-18।