3. संघीय संविधान समिति की रिपोर्ट - Page 43

24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कराने के लिए राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक केन्द्रीय आयोग होगा। यद्यपि इस स्कीम में यह सोचा गया था कि निर्वाचनों का निरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक केन्द्रीय आयोग होना चाहिए। फिर भी यह कभी नहीं सोचा गया कि दिल्ली में या किसी केन्द्र में पीठासीन केवल एक आयोग होगा जहाँ केन्द्रीय सरकार आसीन होगी। स्कीम यह थी कि एक केन्द्रीय आयोग होगा जो संभवतः परिसंघीय संसद के निर्वाचनों से संबंधित काम करेगा किन्तु उस आयोग का हर प्रांत में अथवा यदि प्रांत इतना छोटा है कि वहां आयोग नहीं बनाया जा सकता तो दो या तीन प्रान्तों को एक साथ मिलाकर एक अधीनस्थ आयोग भी होगा। ताकि स्थानीय आयोग द्वारा निर्वाचन संबंधी कार्यकलाप संपन्न कराये जा सकें। शुरु से ही विचार यह था कि इसे विकेंद्रित किया जाना चाहिए। एक केन्द्रीय आयोग परिसंघ के निर्वाचनों के लिए होना चाहिए तथा विभिन्न प्रांतों में किए जाने वाले निर्वाचनों के लिए अनेक आयोग होने चाहिएं। मेरा निवेदन है कि यदि यह स्कीम कार्यान्वित होती है तो उस मुद्दे का लाभ होगा जो मेरे मित्र श्री पाटस्कर के मन में संशोधन पेश करते समय था क्योंकि जहाँ तक मैं उनको समझता हूँ वह चाहते थे कि एक स्थानीय प्राधिकरण या स्थानीय आयोग होना चाहिए जो उस प्रांत में निर्वाचन संबंधी कार्य सम्पन्न करेगा और उनसे सम्बद्ध रहेगा। मेरे विचार से यही हमारा अभिप्राय था, हालांकि उस स्कीम का खंड 24 में कोई उल्लेख नहीं है। निस्संदेह यह विषय हमारे मन में था। फिर भी यदि मेरे मित्र पाटस्कर अपने संशोधन को पेश करना चाहते हैं तो मैं उनसे एक सवाल पूछना चाहूँॅगा। वह यह कि जब आप उनके द्वारा तैयार किए गए संशोधन को पढ़ते हैं तो एक आशंका सामने आती है। वह चाहते हैं कि ‘‘सभी निर्वाचनों’’ के स्थान पर ‘‘सभी परिसंघीय निर्वाचनों’’ शब्द रखा जाए। मुझे उनके संशोधन पर बहुत आपत्ति नहीं है बशर्ते कि वह एक मुद्दे पर मुझे आश्वस्त कर दें। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि वह इस सिद्धांत को स्वीकार करते हैं कि निर्वाचनों का भाग कार्यपालिका से बाहर किसी स्वाधीन निकाय को सौंपा जाए? यदि इसे स्वीकार करते हैं तो व्यक्तिगत तौर पर, जैसा कि मैंने कहा था, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी, यदि सदन द्वारा यह भी मान लिया जाए कि खंड 24 जैसा खंड संविधान प्रांतीय भाग में समाविष्ट किया जाएगा। केन्द्रीकरण की मेरी कोई इच्छा नहीं है। हमारे दिमाग में जो बात थी वह यह थी कि निर्वाचनों का काम समकालीन सरकार के हाथों से ले लिया जाना चाहिए।

[ कैबिनेट मिशन ने मूल अधिकारों पर अल्पसंख्यकों आदि पर सलाहकार समिति के गठन की सिफारिश की थी। तद्नुसार संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1947 को एक संकल्प के द्वारा सरदार पटेल की अध्यक्षता में सलाहकार समिति का गठन किया था। समिति में 50 सदस्य थे जिनमें डॉ. अम्बेडकर भी थे। अपने काम को सुचारु ढंग से करने के लिए सलाहकार समिति ने चार उपसमितियाँ नियुक्त कींः-