5. संविधान सभा कार्य समिति की रिपोर्ट - Page 48

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चाहिए। मेरे विचार में सबसे पहले समिति की सिफारिशों की ओर ध्यान आकृष्ट करना पर्याप्त होगा।

समिति ने कुल पांच सिफारिशें की हैं। उसकी पहली सिफारिश है कि संविधान सभा विधायिका के रुप में काम करने के लिए स्वतंत्र है और यह कि उसे इस रुप में काम करना चाहिए_ (2) विधायिका के रुप में काम करते हुए यथासंभव विधानसभा के नियम आवश्यक संशोधनों के साथ अपना लेने चाहिएँ_ (3) संविधान सभा के सभापति के आदेश से आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए_ (4) संविधान निर्माण करने वाले निकाय के रुप में और साधारण विधानमंडल के रुप में संविधान सभा का काम अलग-अलग किया जाना चाहिए तथा पृथक-पृथक सत्रों में किया जाना चाहिए जो अलग-अलग दिनों में आयोजित किए जाएँ_ (5) सत्रावसान की शक्ति सभापति में होनी चाहिए न कि गवर्नर जनरल में जैसा कि भारत शासन अधिनियम के अनुकूल (एडेप्टेशन) में पाया जाता है। ये सिफारिशें करने के बाद समिति ने इस पर विचार किया कि क्या ऐसी कुछ कठिनाइयॉ हैं जो उसकी सिफारिशों को कार्य रुप देने में बाधक बनेंगी और इस दौरान उसे तीन कठिनाइयाँ मिलीं जो उसे अपनी सिफारिशों को कार्य रुप देने के लिए दूर करनी पड़ीं।

पहली, क्या संविधान सभा और विधायिका दोनों निकायों की अध्यक्षता एक ही व्यक्ति करे। इसमें कठिनाई पैदा हो गई थी क्योंकि भारत शासन अधिनियम की धारा 22 जो स्पीकर (अध्यक्ष) के पद के विषय में थी, एडेप्टेशन द्वारा निकाल दी गई थी। ये एडेप्टेशन भारतीय स्वाधीनता अधिनियम के अधीन किए गए थे। परिणामस्वरुप सभापति ही एकमात्र व्यक्ति है जिसे संविधान निर्माण निकाय एवं विधानमंडल दोनों की अध्यक्षता करनी है। साधारणतया इसमें कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए, लेकिन उस परिस्थिति में जब उदाहरणार्थ, सभापति (प्रेसिडेन्ट) राज्यमंत्री हो तो यह कठिनाई पैदा हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि सभापति को जो एक राज्यमंत्री भी है, उस समय संविधान सभा की अध्यक्षता करनी पड़े जब वह विधान बनाने का काम कर रही हो। परिणामस्वरुप समिति ने सोचा कि कोई-सा एक मार्ग अपनाना होगा_ या तो सभापति मंत्री न रहे अथवा यदि वह मंत्री बना रहता है तो सभा एक दूसरे अधिकारी का चुनाव करे जो अध्यक्ष (स्पीकर) या उपाध्यक्ष कहलाए। उसका काम उस समय संविधान सभा की अध्यक्षता करना होगा, जब वह विधि निर्माण के प्रयोजन के लिए सत्र में हो।

समिति के सामने जो दूसरी कठिनाई आई वह राज्यों के प्रतिनिधियों के बारे में थी। सदन को ध्यान होगा कि संविधान सभा, जब विधि निर्माण के प्रयोजन से बैठेगी तो वह उस सम्पूर्ण क्षेत्र पर काम करेगी जो भारत शासन अधिनियम की सातवीं अनुसूची की