30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
सूची सं. 1 में अंकित है। सदन को यह भी ध्यान होगा कि देशी रियासतों ने फिलहाल संविधान सभा में भाग अंगीकार पत्र के आधार पर लिया है जो सूची सं. 1 में दिए गए विषयों से पूरी तरह नहीं मिलते। वस्तुतः अंगीकार पत्र में शामिल विषय-सूची सं. 1 में शामिल किए गए विषयों से काफी कम है। अतः प्रश्न यह उठता है कि क्या उन लोगों को जो संविधान सभा के सदस्य नहीं हैं और जो अंगीकार पत्र से आबद्ध हैं तथा कम विषयों के लिए उत्तरदायी हैं, कुछ अन्य विषयों से संबंधित जो अंगीकार पत्र में दी गई सूची में सम्मिलित नहीं किए गए थे, प्रस्तावों और वाद-विवाद में भाग लेने देना चाहिए। निस्संदेह इस मामले से निपटने के दो उपाय थे। एक उपाय था ‘‘अन्दर और बाहर’’ की प्रक्रिया अपनाना-कि वे सभा में बैठें और मतदान करें जब बहस की मद अंगीकार पत्र और सूची संख्या 1 दोनों में एक-सी हो और जब सदन में ऐसे मद पर चर्चा चल रही हो जो अंगीकार पत्र में नहीं है तो उन्हें उसमें भाग न लेने दिया जाए। समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि यद्यपि सैद्धांतिक दृष्टि से दूसरा उपाय तर्कसंगत था, फिर भी व्यावहारिक दृष्टि से हमारी वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा अंतर नहीं किया जाना चाहिए। अतः समिति ने सिफारिश की कि सूची सं. 1 और अंगीकार पत्र में अंकित विषयों के बावजूद देशी रियासतों के प्रतिनिधि सभी विषयों से संबंधित सभी प्रस्तावों में भाग लेते रहेंगे, भले ही दोनों सूचियों में अंतर हो।
समिति ने महसूस किया कि तीसरा विचारणीय प्रश्न मंत्रियों के स्थान के बारे में है। जैसा कि सदन को विदित है, कुछ मंत्री ऐसे हैं जो फिलहाल संविधान सभा के सदस्य नहीं हैं। ऐसे मंत्रियों की संख्या पाँच है। अतः विचारणीय प्रश्न यह है कि जो मंत्री संविधान सभा के सदस्य हैं उन्हें क्या संविधान सभा और विधानमंडल की कार्यवाहियों में भाग लेना चाहिए। जहाँ तक उनके विधानमंडल के काम में भाग लेने का संबंध है, यह स्थिति इस तथ्य से सुरक्षित है कि एडेपटेशन द्वारा भारत शासन अधिनियम की धारा 2 उपधारा (2) को रख लिया गया तथा सदन के सदस्य यह जानने हैं कि धारा 10 की उपधारा 2 के उपबंधों के अधीन भले ही कोई व्यक्ति विधानमंडल का सदस्य न हो, फिर भी वह विधानमंडल के कार्य में भाग ले सकता है और मंत्री हो सकता है। अतः इसके अधीन जो मंत्री संविधान सभा के सदस्य नहीं हैं वे राज्यमंत्री रहते हुए, संविधान सभा में उस समय बैठने के हकदार होंगे जब वह विधानमंडल के रुप में काम करें।
अब प्रश्न यह है कि संविधान सभा से उनका क्या संबंध होगा। फिलहाल चूंकि वे संविध्सान सभा के सदस्य नहीं हैं इसलिए वे संविधान सभा के काम में, जहाँ तक संविधान निर्माण का संबंध है, भाग लेने के लिए हकदार नहीं हैं। समिति इस नतीजे पर पहुंची कि यह आवश्यक है कि संविधान निर्माण के विषय में उनका मार्गदर्शन