5. संविधान सभा कार्य समिति की रिपोर्ट - Page 50

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संविधान सभा को सुलभ हो, इसलिए जिस प्रकार धारा 10 की उपधारा (2) उन्हें विधानमंडल के काम में भाग लेने की इजाजत देती है, उसी प्रकार संविधान सभा को भी एक उपबंध करना चाहिए जिसके अनुसार सरकार के वे सदस्य भी जो संविधान सभा के सदस्य नहीं हैं, संविधान सभा की कार्यवाही में भाग ले सकें।

श्रीमान्, दो अन्य विषय ऐसे हैं जिनके बारे में समिति ने कोई सिफारिश नहीं की है और यह आवश्यक है कि मैं उनका उल्लेख करुँ। प्रथम, दोहरी सदस्यता का प्रश्न है। जैसा कि सदन को ज्ञात है संविधान सभा के कुछ सदस्य ऐसे हैं जो प्रांतीय विधानमंडल के भी सदस्य हैं। अभी तक तो कोई विसंगति नहीं है, क्योंकि संविधान सभा विधानमंडल नहीं है। लेकिन जब संविधान सभा विधानमंडल के रूप में कार्य करने लगेगी तो दोहरी सदस्यता की वजह से निस्संदेह टकराव उत्पन्न होगा। मैं भारत शासन अधिनियम की धारा 68(2)के उपबंध की ओर ध्यान आकृष्ट करना चाहूँॅगा जो इस विषय में है। धारा 68(2) के अनुसार कोई सदस्य दो विधानमंडलों-केन्द्रीय और प्रांतीय की दोहरी सदस्यता नहीं कर सकता। लेकिन इस उपबंध को अब एडेटेंशन द्वारा हटा दिया गया है। परिणामस्वरूप अब संविधान सभा के सदस्य, विधानमंडल के सदस्य के रूप में काम करते समय किसी दूसरी विधायिका के सदस्य नहीं हो सकते। निस्संदेह यह विसंगति विशुद्ध रूप से और पूरी तरह सांविधानिक दृष्टि से, अब भी विद्यमान है। यह विनिश्चिय करना संविधान सभा का काम है कि क्या वे धारा 68(2) के लोप में समाविष्ट सिद्धांत को स्वीकार करेंगे और दोहरी सदस्यता की अनुमति देंगे अथवा क्या धारा 68(2) के हटाए जाने के बावजूद दोहरी सदस्यता को रोकने के लिए कोई उपयुक्त कार्रवाई करेंगे।

दूसरा प्रश्न जिसके बारे में समिति ने कोई सिफारिश नहीं की है, संविधान सभा के प्रशासनिक संगठन के विषय में है। सभा में प्रशासनिक संगठन अकेला एकीकृत संगठन है, अतः यह संविधान सभा के सभापति के अनन्य नियंत्रण में है। जब तक संविधान सभा के पास केवल एक और अनन्य काम था- संविधान तैयार करना, तब तक इस विषय में कोई कठिनाई नहीं थी। लेकिन जब संविधान सभा दोहरी हैसियत से काम करेगी-यह संविधान निर्माण निकाय के रूप में और दूसरे विधि निर्माण करने वाले निकाय के रूप में जिसकी अध्यक्षता एक अन्य व्यक्ति अर्थात् स्पीकर (अध्यक्ष) या डिप्टी स्पीकर (उपाध्यक्ष) करेगा तब कर्मचारियों में तालमेल के सवाल पैदा हो सकते हैं। किन्तु समिति का विचार था कि सौंपी गई विषय-सूची के अंतर्गत वे इस विषय पर विचार करने के हकदार नहीं हैं अतः उसने इस पर कोई विचार नहीं किया।

श्रीमान्, मेरे विचार में मुझे सदन का अधिक समय नहीं लेना चाहिए। मैं समझता हूँ कि मैंने जो कुछ कहा है वह सदन के सदस्यों को यह स्मरण कराने के लिए पर्याप्त