32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
होगा कि समिति ने क्या-क्या किया है और इससे बढि़या तरीके से रिपोर्ट पर विचार करने के लिए आगे बढ़ सकेंगे।
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सभापतिः मेरे विचार में, हम इस पर काफी चर्चा कर चुके हैं। अब मैं डॉ. अम्बेडकर को उत्तर देने के लिए बुलाता हूँॅ।
# माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः सभापति जी, समिति की रिपोर्ट पर मिश्रित प्रतिक्रिया हुई है। सदन के कुछ सदस्यों ने इसे गड़बड़ दस्तावेज कहा। जिन लोगों ने इस रिपोर्ट को ऐसा नाम दिया हैं उन्हें मैं कोई जवाब देना नहीं चाहता, क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर मैं समझता हूँ कि उनके द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर बहुत विचार करना आवश्यक नहीं है। मैं केवल अपने जवाब में कुछ तकनीकी मुद्दों का समाधान करना चाहता हूँॅ। ये मुद्दे मेरे मित्र डॉ. देशमुख और श्री विश्वनाथ दास ने उठाए हैं। डॉ. देशमुख ने समिति की दो सिफारिशों का जिक्र किया है। उनमें से एक सिफारिश समिति की सब कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्यों को दी जाने वाली अनुमति के संबंध में थी। दूसरी सिफारिश जिसका उन्होंने संकेत दिया था, राज्यमंत्रियों के बारे में थी, जिनके बारे में समिति ने कहा था कि सभा की कार्यवाहियों में भाग लेने के लिए भी अनुमति देना वांछनीय नहीं होगा। डॉ. देशमुख ने कहा है कि समिति ने जो मत व्यक्त किया है वह तार्किक और उपयोगी है। समिति ने यह नहीं कहा कि यह सांविधानिक है। मुझे इस प्रश्न पर बड़ा आश्चर्य हुआ, विशेष रुप से इसलिए कि डॉ. देशमुख एक वकील हैं। दरअसल, उन्हें समझ लेना चाहिए था कि वास्तव में कोई संविधान है ही नहीं। संविधान सभा संविधान बना रही है, और संविधान सभा जो कुछ करती है वह सांविधानिक होगा (सुनिये सुनिये)। यदि संविधान सभा कहती है कि राज्यों के प्रतिनिधियों को भाग नहीं लेना चाहिए तो वह पूरी तरह सांविधानिक होगा। यदि संविधान सभा का कहना है कि उन्हें भाग लेना चाहिए तो वह भी पूरी तरह सांविधानिक होगा। इसलिए मेरे विचार में इस प्रकार की मताभिव्यक्ति एकदम गलत थी। मेरे मित्र श्री विश्वनाथ दास द्वारा उठाए गए मुद्दे के बारे में मुझे बड़ा आश्चर्य है कि उन्होंने यह विचार प्रकट करना ठीक समझा जो उन्होंने व्यक्त किया है। यदि मुझे उनका कथन ठीक-ठीक याद है तो उनके विचार दो मुद्दों पर और थे। उनका कहना है कि समिति संविधान सभा को दो भागों में बांट रही है। यह एक अविभाज्य निकाय है, यह अखंड रूप में काम कर रही है। मुझे नहीं मालूम कि क्या वह यह समझ पाने की स्थिति में नहीं हैं कि
* . सी.ए.डी. आधिकारिक रिपोर्ट, खण्ड 5, 29 अगस्त, 1947, पृष्ठ संख्या 327-31