5. संविधान सभा कार्य समिति की रिपोर्ट - Page 52

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संविधान बनाने का काम साधारण विधि बनाने से बिल्कुल भिन्न है। संक्षेप में मुझे अंतर यह प्रतीत होता है कि संविधान सभा संविधान से आबद्ध नहीं है लेकिन विधानमंडल संविधान से आबद्ध है। जब संविधान सभा विधानमंडल की हैसियत से काम करती है तो वह स्वाधीनता अधिनियम द्वारा यथा अनुकूलित भारत शासन अधिनियम से आबद्ध होती है। हर कोई व्यवस्था का प्रश्न उठाने की स्थिति में होगा कि कोई प्रस्ताव विशेष शक्तिबाह्य है या शक्ति के अंतर्गत है। लेकिन निश्चय ही ऐसा सवाल उस समय नहीं उठ सकता जब संविधान सभा संविधान बनाने का काम कर रही है। और मेरे विचार में यह काफी बड़ा अंतर है। इससे हम हर दशा में कल्पना करके यह समझ सकते हैं कि दो कृत्य अलग-अलग हैं और इनके प्रयोजन भिन्न-भिन्न हैं, काम भिन्न और यदि हम भ्रांति से बचना चाहते हैं तो ऐसा करने का व्यावहारिक तरीका यह होगा कि संविधान सभा विधानमंडल से सुभिन्न एक पृथक सत्र में बुलाई जाए। उन्होंने कुछ शिकायत अनुकूलनों के खिलाफ भी की है। अब मुझे मुक्त भाव से यह कहना होगा कि भारत शासन अधिनियम, 1935 में जो अनुकूलन समाविष्ट किए गए हैं, उनके लिए हममें से कोई भी जिम्मेदार नहीं है।

यदि वह भारत स्वाधीनता विधेयक की खण्ड 8 के उपखंड (1) के प्रति निर्देश कर रहे हैं तो वह महसूस करेंगे कि इस खण्ड के अधीन नई परिस्थिति के अनुरूप भारत शासन अधिनियम, 1935 का अनुकूलन करने की शक्ति जो विधानमंडल के रूप में संविधान सभा के पास है, पूर्णतः गवर्नर जनरल में निहित है। मेरे विचार में, यह संभव है कि गवर्नर जनरल ने यह फैसला करने के लिए किसी स्रोत से सलाह ली हो कि क्या-क्या अनुकूलन समाविष्ट किए जाएँ। इसलिए इस क्षण इसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं है। यदि भारत शासन अधिनियम, 1935 में शामिल किए गए अनुकूलनों से संविधान सभा का समाधान नहीं हुआ है, तो उसी खण्ड 8 के उपखण्ड (1) में लिखा है कि संविधान सभा अनुकूलनों में परिवर्तन करके तथा अन्य किसी को शामिल करके पूरी तरह अपनी क्षमता के अंतर्गत कार्य करेगी। अतः मेरा निवेदन है श्रीमान् कि समिति के आलोचकों ने जो मुद्दे उठाए हैं उनमें कोई सार नहीं है।

दूसरा मुद्दा है जिसकी ओर मेरे मित्र श्री कृष्णमाचारी ने इंगित किया है। उन्होंने कहा है कि श्री मुंशी के संकल्प में रिपोर्ट के दूसरे भाग पर ध्यान दिया गया है। वह भाग इस प्रश्न पर है कि सभापति ही विचार-विमर्श और प्रशासनिक दोनों पक्षों का एकमात्र प्राधिकारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि संकल्प, जो श्री मुंशी द्वारा तैयार किया गया है और हमारे सामने पेश किया गया है, में विशेष रूप से समिति के सभी प्रस्ताव स्वीकार कर लिए गए हैं, यह उपबंध विशेष नहीं था। मैं यह कहना चाहूँगा कि यदि श्री कृष्ण