5. संविधान सभा कार्य समिति की रिपोर्ट - Page 53

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

माचारी रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ें, तो उन्हें मालूम हो जाएगा कि रिपोर्ट का भाग विशेष समिति की ओर से की गई मताभिव्यक्ति है, न कि सिफारिश। अतः मेरे मित्र श्री मुंशी ने इसका उल्लेख न करके पूरी तरह न्यायोचित कार्य किया है।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्राः श्रीमान्, मैं डॉ. अम्बेडकर से कुछ जानकारी प्राप्त करना चाहता हूँॅ। सबसे पहले मैं उनसे यह जानना चाहता हूँ कि ..................... आदि।

एक माननीय सदस्यः यह भाषण है या सवाल है?

सभापतिः मैं पंडित मैत्रा को स्मरण करा दूँ कि वह भाषण नहीं दे सकते। उन्होंने प्रश्न पूछा है और यदि डॉ. अम्बेडकर चाहेंगे तो वह उसका उत्तर देंगे।

एक माननीय सदस्यः प्रश्न ही सही नहीं है।

पंडित लक्ष्मी कांत मैत्राः इसकी इजाजत क्यों नहीं दी जा सकती? जब माननीय सदस्य बहस का जवाब देते हैं और माननीय सदस्य उसे समझ नहीं पाते हैं तो मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए वह साधिकार आगे सवाल कर सकते हैं।

सभापतिः आपने प्रश्न पूछा है। डॉ. अम्बेडकर उत्तर देंगे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मैं संक्षेप में जवाब दूँगा। पहला सवाल था कि क्या भारत शासन अधिनियम के अनुकूलनों में हमने कोई परिवर्तन करना सोचा है। मेरा जवाब है कि यह तय करना सदन का काम है कि वह कौन से अनुकूलन चाहता है। लेकिन मैं अपने मित्र को यह आश्वासन देना चाहता हूँ कि हमारे पास अनुलनों को बदलने की शक्ति है। अनुकूलनों सहित भारत शासन अधिनियम हम पर इस अर्थ में समग्रतः आबद्धकर नहीं है कि परिवर्तन हमारे क्षेत्राधिकार के बाहर नहीं हैं। यदि किसी विषय पर पुनर्विचार करके सदन पाए कि कुछ अनुकूलनों को परिवर्तित किया जाना चाहिए तो उस उपबंध को लेना सर्वथा संभव होगा।

मेरे माननीय मित्र श्री मैत्रा ने जो दूसरा सवाल पूछा था, वह यह था कि क्या प्रशासन की एकता प्रभावित होने की संभावना है और इस तथ्य की दृष्टि से मतभेद होने की संभावना है कि दो पद हो सकते हैं-एक सभापति (प्रेसिडेन्ट) का जो संविधान सभा की अध्यक्षता करें और दूसरा अध्यक्ष (स्पीकर) का जो विधानमंडल की अध्यक्षता करे। समिति का कहना है कि टकराव की सैद्धांतिक संभावना है। लेकिन मैं समझता हूँ कि टकराव होना जरुरी नहीं है। व्यवहार में, सभा के सभापति और अध्यक्ष का दो पदों एक एकात्मक रूप में काम करना पूरी तरह संभव होना चाहिए और संविधान सभा तथा