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विधानमंडल के कार्यघंटों का इन्तजाम इतना सही ढंग से होना चाहिए कि इस तथ्य के बावजूद कि हमारे यहां दो पद हैं, हमें इस बात से भयभीत होने की जरूरत नहीं कि टकराव अवश्यमेव होगा ही।
जहां तक तीसरे प्रश्न का संबंध है, प्रकट है कि संविधान सभा को विधायी निकाय में बदलने के लिए हम अब जो व्यवस्था कर रहे हैं वह निस्संदेह अस्थायी होगी। यह तब तक रहेगी जब तक संविधान निर्माण का काम पूरा नहीं हो जाता। संविधान निर्माण का काम पूरा होने पर प्रकट है कि कोई न कोई भी व्यवस्था विलुप्त हो जाएगी और तब हम विधानमंडल के रूप में ही कार्य करेंगे।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः एक और सवाल माननीय सदस्य ने कहा कि सदन द्वारा पुनः अनुकूलन किया जा सकता है। क्या गवर्नर जनरल के लिए और आगे अनुकूलन करना संभव है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः यह कानून का सवाल है। सदन को अनुकूलन को बदलने की शक्ति है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुझे इससे इनकार नहीं। सवाल यह है कि क्या माननीय सदस्य की राय में गवर्नर जनरल और आगे अनुकूलन कर सकते हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः नहीं, क्योंकि उन्हें अपने मंत्रियों की सलाह पर काम करना होगा।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः क्या वह ऐसा अपने मंत्रियों की सलाह पर कर सकते हैं?
एक माननीय सदस्यः क्या यह न्यायालय है या प्रतिपरीक्षा (जिरह) है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः मुझे पक्का मालूम नहीं और मैं एकदम जवाब देना पसंद नहीं करता।
सभापतिः मेरे विचार में, हमें प्रस्ताव को खण्ड-खण्ड में रखना है जैसा कि सुझाव दिया गया था।
[ प्रस्ताव खण्ड-खण्ड के रुप में अंगीकार किया गया। इसके बाद निम्नलिखित रुप में संकल्प अंगीकार कर लिया गया-संपादक ]
सभापतिः प्रश्न यह हैः कि संकल्प समग्र रुप में अंगीकार किया जाए अर्थात्-