38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
नए नियमों 38क से 38बी को जोड़ना
[#] श्रीमती जी दुर्गाबाई (मद्रासः साधारण)ः सभापति, महोदय मुझे मेरा प्रस्ताव पेश करने की अनुमति देने की कृपा करें। यह प्रस्ताव है-
संविधान सभा निम्नलिखित नियमों के संशोधनों पर विचार करे-
नियम 38 के बाद निम्नलिखित जोडि़ए-
प्रस्तावित नियमों के द्वारा एक अध्याय अर्थात् अध्याय 6(क) में भारत के संविधान के बारे में उपबंध करने के लिए विधायन प्रक्रिया दी गई है। वे नियम 38ए से लेकर 38बी तक 22 नियमों में फैले हुए हैं और दो प्रवर्गों में विभाजित हैं।
(इस प्रस्ताव के बाद चर्चा हुई। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर आलोचना का उत्तर देने के लिए उठे-संपादक)
* माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (बम्बईः साधारण)ः सभापति महोदय, मैं श्रीमती दुर्गाबाई के प्रस्ताव के बारे में श्री संथानम द्वारा की गई आलोचनाओं में से कुछ का जवाब देने के लिए तैयार हूँ। प्रस्ताव में इस संविधान सभा द्वारा कुछ नियमों को अंगीकार किया जाना प्रस्तावित है। उनके प्रस्ताव की आलोचनाओं में एक आलोचना श्री संथानम द्वारा की गई है। श्री संथानम की मुख्य आलोचना यह है कि वर्तमान नियम 24 हमारे वर्तमान प्रयोजन के लिए बहुत पर्याप्त है और किसी नये नियम की जरूरत नहीं है। मुझे यकीन है कि जब श्री संथानम प्रस्ताव का विरोध करने के लिए उठे तो उन्होंने इस सवाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। नियम 24 में प्रस्ताव का उल्लेख है। उसमें कहा गया है कि इस सदन में प्रस्ताव लाकर कुछ भी किया जा सकता है। यह बिलकुल सच है लेकिन मुझे यकीन है कि श्री संथानम यह नहीं समझ पाए कि यह सर्वव्यापी नियम पर्याप्त नहीं होगा और विस्तृत नियमों की जरूरत है। प्रस्तावों के दो प्रवर्ग हैं एक वह प्रस्ताव है जिससे आगे कोई चरण नहीं होता। वे उस प्रस्ताव विशेष पर सदन द्वारा लिए गए फैसले से ही समाप्त हो जाते हैं। दूसरे प्रकार के प्रस्ताव वे हैं जिनके आगे और भी चरण होते हैं। इस प्रकार के प्रस्ताव का एक खास दृष्टांत है-विधेयक पुनःस्थापित करने का प्रस्ताव। जो विधेयक प्रस्ताव से पुनःस्थापित किया जाता है वह उस प्रस्ताव विशेष से समाप्त नहीं होता है यदि सदन उस प्रस्ताव के पक्ष में फैसला करता है। उसके लिए और आगे भी चरणों को पार करना होता है। अतः यह जरूरी है कि इस प्रकार के प्रस्ताव के आगे के चरणों में एक खास नियम से विनियमित किए जाएँ।