7. संविधान सभा नियमों में नये नियम 38क से 38 जोड़ना - Page 58

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मेरा विचार है कि यदि मेरे मित्र श्री संथानम संविधान सभा (विधायी) नियमों को देखते, तो वह यह देख सकते थे कि जो उपबंध नए नियमों में किया गया है, जो श्रीमती दुर्गाबाई द्वारा पेश किया गया था वह संविधान सभा के नियमों और स्थायी आदेशों में अंकित उपबंधों के अनुरुप था। उदाहरण के लिए, वह देखेंगे कि संविधान सभा के नियमों के नियम 24 के सदृश स्थायी आदेश सं. 30 है जो हूँ-ब-हूँ नियम 29 जैसी ही शब्दावली में लेखबद्ध है। इसके बावजूद, एक दूसरा स्थायी आदेश है अर्थात् स्थायी आदेश सं. 37, जिसमें विधेयकों के लिए उपबंध किया गया है और यह भी अधिकथित है कि उनके बारे में आगे कौन से प्रस्ताव सदन में पेश किए जा सकते हैं। इसलिए इस आधार पर नया नियम अपनाने के लिए किया गया प्रस्ताव संविधान सभा द्वारा उसकी विधायी हैसियत में अंगीकृत प्रक्रिया के अनुरूप है। मेरा विचार है कि यदि संविधान सभा विधायन संबंधी अपने कार्य को सम्पादित करने के लिए केवल नियम 24 पर आश्रित रही तो मेरे मन में लेश भी संदेह नहीं है कि पूरी अराजकता फैल जाएगी। यदि केवल नियम 24 हो तो प्रस्तावों की संख्या और उनकी प्रकृति के बारे में कोई सीमा नहीं हो सकती। माननीय सदस्य विधानसभा नियमों में देखेंगे कि किसी विधेयक के पुनःस्थापित हो जाने के बाद केवल तीन प्रस्तावों की इजाजत होती है। एक परिचालित करने का प्रस्ताव, दूसरा विधेयक को एक प्रवर समिति के पास भेजने का प्रस्ताव और तीसरा विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव। यदि हमारी कार्यवाहियों को लागू होने के लिए केवल नियम 24 होगा तो कोई भी सदस्य अपनी मर्जी से कोई भी प्रस्ताव रखने के लिए स्वतंत्र होगा। वस्तुतः कुछ दशाओं में जरूरी होगा कि इन तीनों प्रस्तावों में से किसी भी एक को पेश करने की आजादी न दी जाए। हमारे नए संविधान विषयक विधेयक को पारित करने के प्रयोजन की अपनी प्रक्रिया में हमने किसी सदस्य द्वारा रखे जाने वाले प्रस्तावित नए नियमों में संविधान के परिचालन के प्रस्ताव की इजाजत नहीं है क्योंकि हमारे विचार में ऐसा करने से विलम्ब होगा। संक्षेप में, ध्यान रखने की बात यह है कि यदि ये नियम अंगीकार नहीं किए गए तो विधेयक के अगले चरणों को नियंत्रित करना असंभव हो जाएगा। इसलिए मेरे विचार में श्री संथानम द्वारा उठाए गए मुद्दे में कोई सार नहीं है।

श्री संस्थानम द्वारा की गई आलोचना का दूसरा मुद्दा नए नियमों में से एक नियम के बारे में है। इस नियम के अनुसार संविधान सभा द्वारा अंगीकृत विधेयक पारित किए जाने पर गवर्नर जनरल की अनुमति होनी आवश्यक है। जैसा कि इस सदन के सदस्यों को याद होगा, वह समिति जिसने संविधान सभा के कृत्यों के विभाजन के बारे में रिपोर्ट दी थीः (1) संविधान सभा द्वारा संविधान विषयक विधियां बनाया जाना और (2) डोमिनियमन विधानमंडल द्वारा सामान्य विधि बनाई जाना, संविधान सभा के कार्य को दो भागों में