7. संविधान सभा नियमों में नये नियम 38क से 38 जोड़ना - Page 59

40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

बांटा गया था-एक भावी संविधान निर्माण का काम और दूसरा, भारत शासन अधि नियम, 1935 तथा भारतीय स्वाधीनता अधिनियम, 1947 में अन्तर्विष्ट वर्तमान संविधान के संशोधन के बारे में। भावी संविधान बनाने और पारित करने को उसकी शक्ति के बारे में गवर्नर जनरल का कोई स्थान नहीं है। संविधान सभा का स्थान ही सर्वोच्च है। इतना ही नहीं कि गवर्नर जनरल की अनुमति आवश्यक नहीं है, अब तैयार किए गए नियमों के अनुसार, सभापति की अनुमति भी अपेक्षित नहीं है। इस सभा द्वारा संविधान पारित किए जाने के बाद सभापति को दी गई एकमात्र शक्ति केवल संकेत स्वरूप उस पर हस्ताक्षर करना है कि वह संविधान का अंतिम अधिनियम है। यह सामान्य अर्थ में अनुमति नहीं है। गवर्नर जनरल की अनुमति को वर्तमान संविधान के संशोधन के बारे में रखे रहने दिया है। मैं जानता हूँ कुछ सदस्य ऐसे हैं जिन्हें इस बात से कष्ट होता है कि ऐसा उपबंध कायम रहने दिया जाए। लेकिन मैं सदन के सामने बताऊंगा कि इस विषय पर सर्वश्रेष्ठ वकीलों ने विचार किया था और उन सबका निष्कर्ष था कि गवर्नर जनरल की अनुमति को बनाए रखना वांछनीय ही नहीं बल्कि आवश्यक भी है। मैं उन कारणों को आपके सामने रखना चाहूँगा। जैसा कि सभी जानते हैं पहले तो संविधान के अनुकूलन की शक्ति गवर्नर जनरल के पास है। अनुकूलन संविधान संशोधन का ही दूसरा नाम है। संविधान अनुकूलन और संविधान संशोधन में बहुत अंतर नहीं है। दोनों बातें एक-सी और एक ही हैं। सवाल यह उठता है कि यदि यह आवश्यक है कि गवर्नर जनरल के पास संविधान का अनुकूलन करने के रुप में उसका संशोधन करने की शक्ति रहे तो फिर तब क्या नुकसान हो सकता है जब इस शक्ति को अनुकूलन से सुभिन्न विधेयक के बारे में भी रखा जाए जिसका उद्देश्य भी वही अर्थात् संविधान का संशोधन करना है।

श्री के. संथानमः कृपया मुझे बताएंगे कि फिर विधेयक लाना ही क्यों चाहते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः जवाब आसान है, आखिरकार अनुकूलन की शक्ति 31 मार्च तक समाप्त हो जाएगी। उसके बाद यदि वर्तमान संविधान का संशोधन करना पड़ा तो क्या होगा? निस्संदेह यदि अनुकूलन की शक्ति 1 अप्रैल को समाप्त हो जाती है और यदि हमारा भावी संविधान भी 1 अप्रैल से लागू होता है तो समस्या कतई नहीं होगी। तब नया संविधान आ जाएगा और वर्तमान संविधान के क्षेत्रों पर पूरी तरह व्याप्त हो जाएगा। लेकिन हमें पूरा भरोसा नहीं है कि ऐसी स्थिति नहीं होगी। हो सकता है नए संविधान के प्रारंभ और 1 अप्रैल, 1948 के बीच अंतराल रह जाए। हो

# . संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, खण्ड 6, 27 जनवरी, 1948 पृष्ठ 29।