7. संविधान सभा नियमों में नये नियम 38क से 38 जोड़ना - Page 61

कि प्रारुपण समिति ने जिसके पास यह मामला भेजा गया था, जो कुछ किया है वह हर प्रकार से ठीक है। इसलिए श्री संथानम और फिर दूसरे मित्रों ने जो मुद्दे उठाये हैं उनमें दरअसल कोई सार नहीं है।

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[#] सभापति- इस प्रस्ताव पर मतदान कराने से पूर्व मैं प्रस्ताव रखने वाले से यह पूछना चाहूँगा कि क्या वह जबाव में कुछ और कहना चाहेंगी।

श्री अनन्तशयनम अय्यंगरः श्रीमान् इससे पूर्व मुझे बीच में थोड़ा सा बोलने की इजाजत दी जाए। मैं माननीय डॉ. अम्बेडकर से यह ज्ञात करना चाहता हूँ कि इस प्रस्ताव को अंगीकार करने से जो परिणाम सामने आएंगे क्या उन्होंने उन पर विचार कर लिया है, क्योंकि अनुकूलित रूप में भारत शासन अधिनियम की धारा 32 के अधीन गवर्नर जनरल को अनुमति देने या उसे रोक कर रखने की शक्ति प्राप्त होगी।

माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह एक सांविधानिक गवर्नर है। वह सलाह पर काम करते हैं।

श्री एम. अनन्तशयनम अय्यंगरः एक मुद्दा और है जिसे स्पष्ट करना जरुरी है। यह निर्धारित किया गया है, कि जब डोमीनियन विधानमंडल किसी विधेयक को पारित करता है तो उस पर गवर्नर जनरल की अनुमति लेना जरूरी होगा। लेकिन क्या यह बात वर्तमान संविधान के संशोधन के संबंध में भी लागू होगी क्योंकि हम यहां डोमीनियन विधानमंडल के रूप में नहीं बल्कि भारत की संविधान सभा की हैसियत से बैठे हैं जो एक संप्रभु निकाय है। इसीलिए तो मैं कहता हूँ, सभापति के नाते आपको शक्ति प्राप्त है। हम यहाँ स्पीकर भी नहीं कहते। क्या माननीय डॉ. अम्बेडकर यह समझते हैं कि जिस प्रकार नया संविधान गवर्नर जनरल के पास नहीं भेजा जाएगा, उसी प्रकार वर्तमान संविधान को भी भेजने की जरुरत नहीं है।

सभापतिः- इस मुद्दे पर डॉ. अम्बेडकर अपने ढंग से उत्तर दे चुके हैं। सवाल पूछने वाला सदस्य संतुष्ट हुआ है या नहीं यह एक भिन्न प्रश्न है, अब मैं प्रस्तावकर्ता को बुलाता हूँ। क्या वह उत्तर में कुछ कहना चाहती हैं?

श्रीमती जी. दुर्गाबाईः- सभापति जी मेरे विचार में अब उत्तर में कहने के लिए बहुत नहीं बचा है क्योंकि डॉ. अम्बेडकर ने कृपा करके स्वयमेव सारी स्थिति स्पष्ट कर दी है और मेरे माननीय मित्रों द्वारा उठाये गए सवालों का उत्तर दे दिया है। लेकिन