7. संविधान सभा नियमों में नये नियम 38क से 38 जोड़ना - Page 62

मैं समझती हूँ कि कुछ सदस्य नियम 38-क में उल्लिखित विधेयकों के बारे में गवर्नर जनरल की अनुमति के विषय में यहाँ रचे गए उपबंध पर काफी कुछ बोल चुके हैं। डॉ. अम्बेडकर भी उस मुद्दे पर बोल चुके हैं इसलिए मुझे उसके बारे में अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी मैं माननीय सदस्यों को यह स्मरण कराना चाहूँगी कि हम अभी तक अनुकूलित रुप में भारत शासन अधिनियम, 1935 से ही शासित होते हैं। उसमें यह उपबंध अभी रखा हुआ है..........

[ श्रीमती दुर्गा बाई का प्रस्ताव अंगीकार कर लिया गया -संपादक। ]

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सभापति- श्री नजीरुद्दीन अहमद अपना संशोधन पेश कर सकते हैं।

* श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान् मुझे उसे पेश करने की अनुमति देने की कृपा करें।

प्रस्तावित नियम 38-ख में ‘‘इन्ट्रड्यूस ए बिल’’ शब्दों के स्थान पर ‘‘इन्ट्रोड्यूस सच ए बिल’’ शब्द रखे जाएं।

श्रीमान् यह संशोधन जरूरी है क्योंकि खंड के शुरू के हिस्से में विधेयक विशेषित है तथा ‘‘सच’’ (ऐसा) शब्द जोड़ने से यह बहुत स्पष्ट हो जाएगा।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, क्या मुझे इस प्रश्न का जवाब देने की इजाजत है। यदि माननीय सदस्य अध्याय के शीर्षक को ही देख लें तो उन्हें पता चल जाएगा कि उसका नाम है- ‘‘भारत के संविधान विषयक उपबंध करने के लिए विधान’’ ये नियम संविधान संशोधन विधेयकों से भिन्न विधेयकों पर लागू नहीं होते। इसलिए ‘सच’ (ऐसा) शब्द एकदम अनावश्यक है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः स्पष्टीकरण के बाद श्रीमान् मैं इसे वापस लेने की इजाजत चाहता हूँ।

[ संशोधन सभा की इजाजत से वापस ले लिया गया। ]

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकरः श्रीमान्, क्या मैं समय बचाने की दृष्टि से एक सुझाव दे सकता हूँॅ? ये सब प्रारुपण संशोधन हैं। बेहतर होगा कि यह सदन यह संकल्प

~ . संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, खण्ड 7, 4 नवंबर, 1948 पृष्ठ, 31-44 ।