प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 66

47

प्रारुप संविधान-चर्चा

प्रारुप संविधान के संबंध में प्रस्ताव

~ सभापतिः मेरे विचार से अब हम चर्चा प्रारंभ करेंगे। मैं माननीय डॉ. अम्बेडकर को अपना प्रस्ताव पेश करने के लिए आमंत्रित करता हूँॅ।

माननीय डॉ.बी. आर. अम्बेडकर (बम्बईः साधारण)ः सभापति जी मैं प्रारुपण समिति द्वारा तैयार किया गया प्रारुप संविधान सदन में पेश करता हूँ और समावेदन करता हूँ कि इस पर विचार किया जाए।

प्रारुपण समिति की नियुक्ति 29 अगस्त, 1947 को संविधान सभा द्वारा पारित संकल्प द्वारा की गई थी। वस्तुतः प्रारुपण समिति को संविधान सभा द्वारा नियुक्त विभिन्न समितियों की रिपोर्टों पर संविधान सभा के विनिश्चयों के अनुसार संविधान निर्माण का काम सौंपा गया था जैसे संघ शक्ति समिति, संघ संविधान समिति, प्रांतीय संविधान समिति तथा मूल अधिकारों, अल्पसंख्यकों, जनजाति क्षेत्रों आदि विषयक सलाहकार समिति। संविधान सभा ने यह भी निर्देश दिया था कि कुछ मामलों में भारत शासन अधिनियम, 1935 में अंतर्विष्ट उपबंधों को अपना लेना चाहिए। उन मुद्दों के सिवाय जिनका उल्लेख तारीख 21 फरवरी, 1948 को मेरे पत्र में किया गया है जिसमें मैंने प्रारुपण समिति द्वारा किए गए विचलनों तथा दिए गए सुझावों का हवाला दिया था, आशा है आप पाएंगे कि प्रारुपण समिति ने दिए गए निदेशों के अनुसार कार्य सम्पन्न किया है।

प्रारुपण समिति द्वारा तैयार किया गया प्रारुप संविधान एक विशाल दस्तावेज हैः इसमें 315 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां हैं। यह अवश्य स्वीकार करना होगा कि किसी भी देश का संविधान इतना बड़ा नहीं है जितना यह प्रारुप संविधान। जिन्होंने इसे नहीं पढ़ा है उनके लिए उसके प्रमुख और विशेष तत्वों को समझना कठिन होगा।

प्रारुप संविधान जनता के सामने आठ महीने तक रहा है। इस लंबे अरसे के दौरान मित्रों, आलोचकों तथा विपक्षियों को उसके उपबंधों के बारे में अपनी राय प्रकट करने के लिए काफी समय मिला है। मैं यह कहने की हिम्मत कर रहा हूँ कि उनमें कुछ बातें अनुच्छेदों के बारे में गलत धारणा और अपर्याप्त समझ के कारण हैं। लेकिन आलोचनाएं हैं और उनका जवाब देना होगा।

इन दोनों कारणों से यह आवश्यक है कि एक विचारार्थ प्रस्ताव पर मैं आप लोगों का ध्यान संविधान के विशेष उपबंधों की ओर आकृष्ट करुँ और उनके बारे में

~ - संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, खण्ड 7, 4 नवंबर, 1948 पृष्ठ, 31-44 ।