48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
की गई आलोचनाओं का जवाब दूँ।
ऐसा करने से पूर्व मैं संविधान सभा द्वारा नियुक्त तीन समितियों की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखना चाहूँॅगा। वे हैं-
(1) चीफ कमिश्नर के प्रांतों विषयक समिति की रिपोर्ट, (2) संघ और राज्यों के बीच वित्तीय संबंध विषयक समिति की रिपोर्ट, (3) जनजातीय क्षेत्र विषयक सलाहकार समिति की रिपोर्ट जो इतनी देर से मिली कि सभा उस पर विचार नहीं कर सकी, हालांकि उसकी प्रतियां सभा के सदस्यों में परिचालित कर दी गई हैं। इन रिपोर्टोंं और उनमें की गई सिफारिशों पर प्रारुपण समिति ने विचार किया है। इसलिए उचित यही है कि वे औपचारिक तौर पर सदन के हवाले कर दी जाएं।
अब मुख्य सवाल पर आते हैं। यदि सांविधानिक विधि के छात्र के हाथ में संविधान की एक प्रति दे दी जाए तो वह निश्चय ही दो सवाल करेगा। पहला, संविधान में कौन-सी शासन प्रणाली परिकल्पित है और दूसरा, संविधान का स्वरूप क्या है? क्योंकि इन्हीं दो महत्वपूर्ण मुद्दों से हर संविधान को निपटना होता है। मैं प्रथम सवाल से शुरू करूंगा।
प्रारुप संविधान में, भारतीय संघ के शीर्ष पर एक पदाधिकारी को रखा गया है जिसे संघ का राष्ट्रपति कहा जाता है। इस पदाधिकारी के पदनाम से संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की याद हो आती है। किन्तु अमरीका में प्रचलित शासन प्रणाली और प्रारुप संविधान में प्रस्तावित शासन प्रणाली के बीच एक से नामों के सिवाय कुछ भी एकरूपता नहीं है। अमरीकी शासन प्रणाली राष्ट्रपति शासन प्रणाली कहलाती है। प्रारुप संविधान में प्रस्तावित प्रणाली संसदीय शासन प्रणाली है। इन दोनों में मूलभूत अंतर है।
अमरीकी राष्ट्रपति शासन प्रणाली में राष्ट्रपति का पद कार्यपालिका का सर्वोच्च पद है। प्रशासन उसमें निहित होता है। प्रारुप संविधान में राष्ट्रपति का वही स्थान है जो इंगलिश संविधान के अंतर्गत सम्राट का है। वह राज्याध्यक्ष तो होता है लेकिन शासनाध्यक्ष नहीं होता। वह राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है लेकिन राष्ट्र का शासन नहीं करता। वह राष्ट्र का प्रतीक होता है। प्रशासन में उसका स्थान मुहर पर एक समारोहात्मक युक्ति का है जिसके द्वारा राष्ट्र के विनिश्चयों का सर्वविदित कराया जाता है। अमरीकी संविधान के अंतर्गत, विभिन्न विभागों के प्रभारी सचिव (मंत्री) राष्ट्रपति के अधीन होते हैं। उसी तरह भारतीय संघ के प्रशासन के विभिन्न विभागों के प्रभारी मंत्री राष्ट्रपति के अधीन होंगे। यहां भी दोनों में एक मूलभूत अंतर है। संयुक्त राज्य अमरीका का राष्ट्रपति साध ारणतया अपने मंत्रियों की सलाह से आबद्ध होता है। वह उनकी सलाह के विपरीत कुछ नहीं कर सकता और न ही वह उनकी सलाह के बिना कुछ कर सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति किसी भी समय किसी भी सचिव को हटा सकता है। भारत