प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 70

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मतदान करने और सार्वजनिक पद धारण करने का अधिकार भी है, राज्य अपने स्वयं के नागरिकों के पक्ष में भेदभाव कर सकते हैं और करते हैं। यह पक्षपात कुछ मामलों में तो इससे भी अधिक है। इस प्रकार राज्य या स्थानीय शासन की सेवा में (नौकरी) पाने के लिए अधिकांश जगह यह आवश्यक होता है कि वह स्थानीय निवासी या नागरिक हो। इसी प्रकार, कानून और औषधि जैसे सार्वजनिक पेशों के लिए लाइसेन्स मंजूर करने के लिए प्रायः यह आवश्यक होता है कि व्यक्ति उस राज्य का निवासी या नागरिक हो। इसके अलावा शराब तथा स्टाक और ब्रांडों की बिक्री जैसे व्यवसायों में सार्वजनिक विनियमन कड़े होना बहुत जरुरी हैं, ऐसी अपेक्षाएं बरकरार रखी गई हैं।

प्रत्येक राज्य के पास अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत कुछ अधिकार भी होते है जो उसके अपने नागरिकों के विशेष फायदे के लिए होते हैं। इसीलिए जंगली शिकार और मछली पकड़ना राज्य के विषय हैं। पारम्परिक तौर पर राज्य अपने नागरिकों की अपेक्षा अनिवासियों से शिकार करने और मछली पकड़ने के लिए ऊंची लाइसेन्स फीस लेते हैं। राज्य, राजकीय कालेजों और विश्वविद्यालयों में अनिवासियों से ज्यादा ट्यूशन फीस लेते हैं तथा आपात स्थिति के सिवाय, अपने अस्पतालों और अनाथाश्रमों में केवल निवासियों को ही दाखिल करते हैं।

संक्षेप में, ऐसे अनेक अधिकार हैं जो राज्य द्वारा अपने ही नागरिकों या निवासियों को दिए जा सकते हैं और अनिवासियों के लिए कानूनी तौर पर मना किए जा सकते हैं, अथवा उन्हें निवासियों की अपेक्षा ज्यादा कठिन शर्तों पर दिए जा सकते हैं। नागरिकों को अपने ही राज्य में जो फायदे दिए जाते हैं वे राज्य नागरिकता के विशेष अधिकार हैं। समग्र रूप से देखें, तो राज्यों के नागरिकों और अनिवासियों के अधिकारों में काफी अंतर हैं अस्थायी और अल्पकालीन प्रवासी कुछ विशेष सुविधाओं के साथ सर्वत्र मिल जाएंगे।

प्रस्तावित भारतीय संविधान के अंतर्गत दोहरा शासनतंत्र होगा और एक नागरिकता होगी। पूरे भारत के लिए केवल एक नागरिकता है। राज्यों की कोई नागरिकता नहीं है। हर भारतीय के नागरिकता के एक जैसे अधिकार हैं चाहे वह किसी भी राज्य में रहता हो।

प्रस्तावित भारतीय संविधान का शासनतंत्र एक अन्य पहलू से भी अमेरिका के शासनतंत्र से भिन्न है। अमेरिका में, परिसंघ (फेडरल) सरकार और राज्य सरकारों के संविधानों में लचीली सम्बद्धता है। अमेरिका में फेडरल सरकार और राज्य सरकारों के संबंधों का वर्णन करते हुए ब्राईस ने कहा है-

‘‘केन्द्रीय या राष्ट्रीय सरकार और राज्य सरकारों की उपमा एक विशाल भवन तथा कुछ छोटे-छोटे भवनों के समूह से दी जा सकती है जो एक ही जमीन पर खड़े हैं फिर