प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 71

52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

भी एक-दूसरे से भिन्न हैं।’’

उनमें भिन्नता है, किन्तु अमेरिका में राज्य सरकारें फेडरल सरकार से कैसे भिन्न हैं? निम्नलिखित तथ्यों से इन भिन्नता का कुछ अन्दाजा लगाया जा सकता हैः

(1) गणतंत्रात्मक शासन प्रणाली बनाए रखने की शर्त के अधीन रहते हुए अमेरिका

में हर राज्य अपना निजी संविधान बनाने के लिए स्वतंत्र है।

(2) राज्य के लोग, राष्ट्रीय सरकार से सर्वथा स्वतंत्र, अपने संविधान में रबदल

करने की शक्ति अपने पास रखे हैं।

इसे ब्राईस के शब्दों में यूं कह सकते हैं-

‘‘(अमेरिका में) राज्य, अपना निजी संविधान होने के कारण, राष्ट्रमंडल के रुप में विद्यमान है, और सभी राज्य प्राधिकरण, विधायी, कार्यपालक और न्यायपालक, संविध ान की देन है, और उसके अधीन हैं।’’

लेकिन प्रस्तावित भारतीय संविधान के बारे में यह सच नहीं है। किसी भी राज्य को (जो भाग 1 मेंं अंकित है) अपना निजी संविधान बनाने का अधिकार नहीं है। संघ और राज्यों का संविधान एक ही सांचा है जिसमें से कोई भी बाहर नहीं जा सकता और जिसके अंतर्गत ही उन्हें काम करना होगा।

मैंने अभी तक अमरीकी फेडरेशन और प्रस्तावित भारतीय फेडरेशन के अंतर पर प्रकाश डाला है। लेकिन प्रस्तावित भारतीय संविधान के कुछ अन्य खास तत्व हैं जो उसे अमरीकी से ही नहीं बल्कि अन्य सभी फेडरेशनों से भी भिन्न बनाते हैं। अमरीकी प्रणाली समेत सभी परिसंघीय प्रणालियां परिसंघवाद के एक कसे हुए सांचे में ढली हैं। चाहे कैसी भी परिस्थितियां हों वह अपने रूप और आकार को नहीं बदल सकता। वह कभी भी एकात्मक नहीं हो सकता। दूसरी ओर, प्रारुप संविधान समय और परिस्थितियों की मांग के अनुरूप एकात्मक और परिसंघीय दोनों हो सकता है। शांतिकाल में इसे परिसंघीय प्रणाली के रूप में काम करने के लिए रचा गया है। लेकिन इसकी रचना इस प्रकार की गई है कि यह युद्धकाल में एकात्मक प्रणाली के रूप में काम करेगा। राष्ट्रपति एक बार उद्घोषणा जारी कर दें जिसके लिए वह अनुच्छेद 275 के अधीन ऐसा करने के लिए प्राधिकृत है, तो सारा परिदृश्य ही बदल जाएगा और राज्य एकात्मक राज्य हो जाएगा। संघ सरकार, यदि चाहे तो उद्घोषणा के अधीन, निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग कर सकती है-

(1) किसी भी विषय पर, भले ही वह राज्य सूची में हो, विधान बनाने की शक्ति, (2) राज्यों को यह निर्देश देने की शक्ति कि वे अपने क्षेत्र के विषयों पर भी अपने कार्यपालक प्राधिकार का प्रयोग किस प्रकार करें, (3) किसी भी अधिकारी में किसी