प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 72

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भी प्रयोजन के लिए प्राधिकार निहित करने की शक्ति, और (4) संविधान के वित्त विषयक उपबंधों को निलम्बित करने की शक्ति एकात्मक राज्य में बदलने की ऐसी शक्ति किसी भी फेडरेशन के पास नहीं है। हमारे प्रारुप संविधान में प्रस्तावित फेडरेशन और हमें ज्ञात अन्य सभी फेडरेशनों में अन्तर का यह एक तत्व है। प्रस्तावित भारतीय परिसंघ (फेडरेशन) और अन्य परिसंघों में केवल यही अंतर नहीं है। परिसंघवाद को कमजोर बताया जाता है यदि वह प्रभावकारी शासन प्रणाली नहीं है। परिसंघ के बारे में कहा जाता है कि इसमें दो कमजोरियां हैं। एक अनम्यता और दूसरी विधिकता। इसके बारे में कोई संदेह नहीं है कि ये दो कमियां परिसंघवाद में अन्तर्निहित हैं। परिसंघीय संविधान लिखित संविधान ही हो सकता है और लिखित संविधान का अनम्य संविधान होना जरुरी है। परिसंघीय संविधान से तात्पर्य है परिसंघ सरकार और राज्यों की बीच सर्वोच्च विधान अर्थात् संविधान द्वारा संप्रभुता का विभाजन। इसके दो परिणाम होते हैंः- (1) राज्यों को सौंपे गए क्षेत्र में परिसंघ सरकार द्वारा और परिसंघ के क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा कोई भी अतिक्रमण संविधान का उल्लंघन है। तथा (2) ऐसा उल्लंघन यदि न्यायोचित है तो यह न्यायपालिका द्वारा ही तय किया जा सकता है। परिसंघवाद की ऐसी प्रकृति के ही कारण, परिसंघीय संविधान विधिकता के आरोप से बच नहीं सकता। परिसंघीय संविधान के ये दोष अमेरिका के संविधान में प्रकृत रूप में पाए जाते हैं।

जिन दोषों ने परिसंघीय व्यवस्था कुछ बाद में अपनाई है उन्होंने उसमें अंतर्निहित अनम्यता और विधिकता से उत्पन्न हानियों को कम करने का प्रयत्न किया है। इस विषय में आस्ट्रेलिया का उदाहरण भली-भांति दिया जा सकता है। आस्ट्रेलियाई संविधान में परिसंघ को कम अनम्य बनाने के लिए निम्नलिखित साधन अपनाए गए हैंः-

(1) राष्ट्रमंडल की संसद को समवर्ती विधायन की व्यापक शक्तियाँ और अनन्य

विधायन की कुछ शक्तियाँ प्रदान करके।

(2) कुछ अनुच्छेदों को केवल तभी तक प्रवर्तनशील बनाकर जब तक संसद

अन्यथा उपबंध न करे।

प्रकट है कि आस्ट्रेलियाई संविधान के अंतर्गत आस्ट्रेलियाई संसद ऐसी बहुत-सी बातें कर सकती है जो अमेरीकी कांग्रेस की क्षमता के अंतर्गत नहीं है और जिन्हें करने के लिए अमरीकी सरकार को उच्चतम न्यायालय का सहारा लेना होगा तथा प्राधिकार के प्रयोग को न्यायोचित ठहराने के लिए एक सिद्धांत प्रतिपादित करने की उसकी योग्यता, प्रज्ञा और इच्छा पर निर्भर करेगा।

अन्यम्यता और विधिकता की कठोरता को हल्का करने के लिए प्रारुप संविधान में स्वयं आस्ट्रेलिया ने भी बड़े पैमाने पर आस्ट्रेलियाई योजना का अनुसरण किया गया है। आस्ट्रेलियाई संविधान की भांति, इसमें भी कानून बनाने की समवर्ती शक्तियों के विषयों की