प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 73

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

एक लम्बी सूची दी गई है। आस्ट्रेलियाई संविधान में 39 समतर्वी विषय हैं। प्रारुप संविधान में ऐसे 37 विषय हैं। आस्ट्रेलियाई संविधान का अनुसरण करते हुए, प्रारुप संविधान में छह अनुच्छेद हैं जिनके उपबंध अस्थायी प्रकृति के हैं जिन्हें संसद किसी भी समय मौके की जरुरत के अनुसार बदल सकती है। प्रारुप संविधान में आस्ट्रेलियाई संविधान से भी आगे सबसे बड़ा कदम यह उठाया गया है कि संसद में विधयन की अनन्य शक्ति केवल 3 विषयों पर है, भारतीय संसद, जैसा कि प्रारुप संविधान में प्रस्तावित है के पास ऐसे 91 विषय हैं। इस प्रकार प्रारुप संविधान द्वारा अपने परिसंघीय ढांचे में सर्वोत्तम संभव लचीलापन सुनिश्चित किया गया है जिसे प्रकृति से ही अनम्य माना जाता है।

यह कहना पर्याप्त नही है कि प्रारूप संविधान आस्ट्रेलियाई-संविधान का अनुसरण करता है या ज्यादा बड़े पैमाने पर उसका अनुसरण करता है। देखने वाली बात यह है कि इसमें परिसंघीय प्रणाली में अर्न्तनहित अनम्यता और विधिकता को दूर करने के नये तरीके जोड़े गए हैं जो अन्यत्र संलग्न नहीं हैं।

प्रथम यह कि संसद को सामान्य काल में भी प्रांतीय विषयों पर अनन्यतः कानून बनाने की शक्ति दी गई है। इस संबंध में अनुच्छेद 226, 227 और 229 का हवाला दिया जा सकता है। अनुच्छेद 226 के अधीन संसद किसी भी प्रांतीय विषय पर उस समय कानून बना सकती है जब वह विषय राष्ट्रीय चिन्ता का विषय बन जाए और विशुद्ध प्रांतीय विषय से सुभिन्न हो जाए, भले ही वह राज्य सूची में अंकित हो, बशर्ते कि केन्द्र द्वारा ऐसी शक्ति के प्रयोग के बारे में उच्च सदन दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे। अनुच्छेद 227 संसद को ऐसी ही शक्ति राष्ट्रीय आपातकाल में प्रदान करता है। अनुच्छेद 229 के अनुसार यदि प्रांत ऐसे प्रयोग की सम्मति देते हैं तो संसद उस शक्ति का प्रयोग कर सकती है। यद्यपि आस्ट्रेलियाई संविधान में अंतिम कला उपबंध विद्यमान है फिर भी प्रथम दो अनुच्छेद प्रारूप संविधान के विशेष तत्व है।

अनम्यता और विविधता से बचने का दूसरा साधन है संविधान में संशोधन करने की सुविधा। संविधान संशोधन के उपबंध संविधान के अनुच्छेद को दो वर्गों में विभाजित करते हैं। पहले वर्ग में निम्नलिखित विषयों वाले अनुच्छेद आते हैंः (क) केन्द्र और राज्यों में विधायी शक्तियों का बंटवारा, (ख) संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, और (ग) न्यायपालिका की शक्तियाँ। शेष सभी अनुच्छेद दूसरे वर्ग में आते हैं। दूसरे वर्ग में आने वाले अनुच्छेदों के अंतर्गत संविधान का एक बहुत बड़ा हिस्सा आता है और संसद उनका संशोधन दोहरे बहुमत से अर्थात् प्रत्येक सदन के कम-से-कम दो तिहाई सदस्यों के बहुमत से जो उपस्थित हों और मतदान करें तथा प्रत्येक सदन के कुछ सदस्यों के बहुमत से। इन अनुच्छेदों का संशोधन करने के लिए राज्यों द्वारा अनुसमर्थन आवश्यक नहीं है। प्रथम वर्ग के अनुच्छेदों के संशोधन के लिए ही राज्यों द्वारा अनुसमर्थन का