64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
रखने की इजाजत है। मैं इसे अत्यंत पश्चगामी और हानिकारक उपबंध मानता हूँ। इससे भारत की एकता भंग हो सकती है और केन्द्र सरकार का तख्ता पलट सकता है। यदि मैं उसके मन का गलत प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा हूँ तो प्रारुपण समिति इस विषय पर बिल्कुल भी खुश नहीं थी। वे चाहते थे कि केन्द्र के साथ सांविधानिक संबंधों के विषय में प्रान्तों और देशी रियासतों में एकरुपता हो। दुर्भाग्यवश वे इसमें सुधार करने के लिए कुछ नहीं कर सके। वे संविधान सभा के विनिश्चयों से आबद्ध थे और परस्पर बातचीत करने वाली दो समितियों द्वारा किए गए समझौते से संविधान सभा भी आबद्ध थी।
लेकिन जर्मनी में जो कुछ हुआ हम उससे हिम्मत जुटा सकते हैं। 1870 में बिस्मार्क द्वारा संस्थापित जर्मन साम्राज्य 25 इकाईयों का एक सम्मिश्र राज्य था। उन 25 इकाईयों में से 22 राजसी इकाईयां थीं और 3 गणतंत्रात्मक राज्य थीं। जैसाकि हम सब जानते हैं कि कालान्तर में यह अंतर गायब हो गया और जर्मनी एक देश बन गया जिसमें लोग एक ही संविधान के अंतर्गत रहते हैं। देशी रियासतों के विलय की प्रक्रिया जर्मनी में हुए विलय की प्रक्रिया से बहुत तेज रहेगी। 15 अगस्त, 1947 को हमारे देश में 600 देशी रियासतें थी। आज देशी रियासतों के भारतीय प्रांतों में मिलने से या आपस में विलय से या केन्द्र द्वारा उन्हें केन्द्र शासित क्षेत्र के रूप में ग्रहण किए जाने से कुछ 20/30 रियासतें ही चलने योग्य रह गई हैं। यह बहुत तीव्र प्रक्रिया और प्रगति है। उन रियासतों से मेरी अपील है जो रह गई हैं वे भारतीय प्रांतों की पंक्ति में आ जाएं और उन्हीं शर्तोंं पर भारतीय संघ की पूर्ण इकाई बन जाएं जिन पर भारतीय प्रांत बने हैं। इससे भारतीय संघ को वह बल मिलेगा जिसकी उसे जरुरत है। इससे वे अपनी स्वयं की संविधान सभा गठित करके अपने पृथक संविधान बनाने की परेशानी से बच जाएंगे और ऐसा कुछ नहीं खोएंगे जो उनके लिए मूल्यवान है। मुझे आशा है, मेरी अपील निष्फल नहीं जाएगी और संविधान पारित होने से पहले हम प्रान्तों और देशी रियासतों के अंतर को मिटाने में समर्थ हो पाएंगे।
कुछ आलोचकों की आपत्ति इस बात पर है कि भारत को प्रारुप संविधान के अनुच्छेद-1 में राज्यों का संघ कहा गया है। कहा जाता है कि सही पद होगा राज्यों का परिसंघ। यह सच है कि दक्षिण अफ्रीका जो एक एकात्मक राज्य है, संघ के रुप में वर्णित किया जाता है। लेकिन कनाडा हालांकि परिसंघ है फिर भी संघ (यूनियन) कहलाता है। इसलिए भारत का संघ (यूनियन) के रुप में वर्णन, हालांकि इसका संविधान फेडरल है, व्यवहार पर कोई चोट नहीं करता। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘‘यूनियन’’ शब्द का प्रयोग सोच-समझकर किया गया है। मुझे नहीं मालूम कि कनाडा के संविधान में यूनियन शब्द का प्रयोग किया गया है। प्रारुपण समिति यह स्पष्ट करना चाहती थी कि यद्यपि भारत एक फेडरेशन (परिसंघ) होना था फिर भी वह फेडरेशन राज्यों द्वारा फेडरेशन में शामिल होने के समझौते का परिणाम नहीं था और यह कि चूंकि फेडरेशन समझौते