प्रारुप संविधान का प्रथम वाचन - Page 86

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डॉ. अम्बेडकर सदन में उपस्थित नहीं है फिर भी मैं यह महसूस करता हूँ कि कम से कम एक वकील के नाते, हमारे प्रारुप संविधान में अन्तर्निहित सिद्धांतों के बारे में उन्होंने जो संतुलित और स्पष्ट विश्लेषण प्रस्तुत किया है उसके लिए मैं उन्हें बधाई देना चाहता हूँ। इस प्रारुप संविधान के बारे में हम जो चाहें भिन्न-भिन्न विचार रखें मैं यह महसूस करता हूँ कि यह मानना होगा कि यदि किसी और दृष्टि से नहीं तो कम से कम भौतिक दृष्टि से यह एक वृहत् दस्तावेज है और मैं समझता हूँ कि यदि हम प्रारुपण समिति के सदस्यों के प्रति विशेष धन्यवाद के शब्द न कहें तो यह हमारी अशिष्टता होगी, क्योंकि मुझे पक्का विश्वास है कि उन्होंने इतने वृहत् दस्तावेज को तैयार करने में बहुत अधिक श्रम और कौशल लगाया है...

ऽऽऽऽऽऽ

[**] अंत में, मैं डॉ. अम्बेडकर की उस भावना का समर्थन करना चाहता हूँ जो उन्होंने अल्पसंख्यकों के निमित्त उपबंधों का मूल्यांकन करते हुए दर्शायी है। मैं जानता हूँ कि (भारत में जो घटना घटी है उसके बाद) अल्पसंख्यकों के बारे में बात करना या अल्पसंख्यकों की समस्याओं के अनुसार यह एक अरुचिकर विषय है और मैं ऐसा करना नहीं चाहता। मैं इन अल्पसंख्यक उपबंधों का मूल्यांकन करना नहीं चाहता क्योंकि वे सलाहकार समिति द्वारा पहले ही स्वीकार किए जा चुके हैं।

# वे कांग्रेस पार्टी द्वारा स्वीकार किए जा चुके हैं, वे संविधान सभा द्वारा भी स्वीकार किए जा चुके हैं। लेकिन मैं यह महसूस करता हूँ कि कांग्रेसी पार्टी की इस जटिल समस्या के प्रति यथार्थवादी और राजनीतिज्ञ जैसी विचारधारा के लिए मुझे उसे धन्यवाद और बधाई देनी चाहिए, और मैं यह महसूस करता हूँ कि हमें अत्यंत यथार्थवादी और राजनीतिज्ञ जैसी विचारधारा के लिए विशेषकर सरदार पटेल को धन्यवाद देना चाहिए। इस बात को दृष्टि से ओझल करना या टालना ठीक नहीं है कि इस देश में अल्पसंख्यक भी रहते हैं। लेकिन यदि हम इस समस्या को उस तरीके से देखें जैसे कांग्रेस ने देखना शुरु कर दिया है तो मुझे विश्वास है कि दस साल में इस देश में कोई अल्पसंख्यक समस्या नहीं रहेगी। विश्वास कीजिए, श्रीमान्, जब मैं आपसे यह कहता हूँ कि मैं बिलकुल भी यह नहीं सोचता कि एक भी ठीक सोच वाला अल्पसंख्यक वर्ग यह नहीं चाहता कि यह देश कम से कम संभव समय में, वास्तविक पंथ निरपेक्ष लोकतांत्रिक राज्य के लक्ष्य को प्राप्त कर ले। हमारा विश्वास है- हमें अवश्य विश्वास करना चाहिए कि उस लक्ष्य की प्राप्ति में इस देश में किसी भी अल्पसंख्यक वर्ग के लिए बड़ी से बड़ी गारंटी निहित ***# . संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 8, 5 नवंबर, 1948, पृष्ठ 227 ।वही, पृष्ठ 227-28 ।एस्ट्रिक्स और डाट्स वाला हिस्सा हटा दिया गया है - संपादक