69
आ पड़ा और निस्संदेह इस कार्य को जिस तरीके से उन्होंने सम्पन्न किया है उसके लिए हम उनके कृतज्ञ हैं। निस्संदेह यह प्रशंसनीय है। परंतु मेरा मुद्दा वास्तव में यह है कि इस तरह के महत्वपूर्ण कार्य पर जितना ध्यान दिया जाना चाहिए था समिति ने समग्र रुप से उतना ध्यान नहीं दिया है। अप्रैल में किसी समय संविधान सभा के सचिवालय ने मुझे और दूसरों को यह सूचित किया था कि आपने विनिश्चय किया था कि संघ शक्ति समिति, हर हालत में उनके सदस्य और कुछ अन्य चुने हुए लोग बैठक करें और सदन के सदस्यों तथा जनसाधारण द्वारा सुझाए गए विभिन्न संशोधनों पर विचार-विमर्श करें। पिछले अप्रैल में एक बैठक दो दिन चली थी और मैं मानता हूँ कि कुछ अच्छा काम हुआ था और मैं देखता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर ने समिति की कुछ सिफारिशें स्वीकार करने का चुनाव किया है, लेकिन उसके बाद इस समिति के बारे में कुछ पता नहीं चला। मैं समझता हूँ प्रारुपण समिति कम से कम डॉ. अम्बेडकर और श्री माधव राव ने उसके बाद बैठक की और संशोधनों की संवीक्षा की और उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं। किन्तु संभवतः तकनीकी अर्थों में यह प्रारुपण समिति नहीं थी। यद्यपि उस विषय पर मैं आपकी व्यवस्था को प्रश्नगत नहीं करुँगा फिर भी यह मानना होगा कि ज्यों ही समिति ने रिपोर्ट दे दी त्योंही समिति कार्य निवृत्त हो गई, और मुझे स्मरण नहीं है कि आपने प्रारुपण समिति का पुनर्गठन किया है......
♣ श्री विश्वाथ दास (उड़ीसा-साधारण)ः उपसभापति महोदय, संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत संविधान के कुशाग्रतापूर्ण विश्लेषण के लिए मैं माननीय डॉ. अम्बेडकर का धन्यवाद करता हूँ श्रीमान्, मैं उनके साथियों को भी धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने इस सदन के सामने पेश किए संविधान का निर्माण करने के लिए छह महीने कठोर परिश्रम किया।
- श्री बी.दास (उड़ीसा-साधारण)ः उपसभापति महोदय, सबसे पहले मैं प्रारुपण समिति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता हूँ। समिति ने संविधान विधेयक को एक रुप और आकृति देने में अत्यंत श्रमसाध्य कार्य किया है जिस पर आज हम विचार कर रहे हैं और जिसमें हम अपनी मर्जी से परिवर्ततन करते हैं ताकि एक उचित प्रमुख सम्पन्न संविधान भारत के लिए प्रकल्पित किया जाए। मैं डॉ. अम्बेडकर और उनके साथियों की प्रशंसा करता हूँ और साथ ही आपके योग्य और पात्र सलाहकारों की भी प्रशंसा करता हूँ।
श्री लोकनाथ मिश्र (उड़ीसा-साधारण)ः महोदय, यह संविधान सभा ऐसे संविधान पर विचार कर रही है जो हमारे भविष्य का संरक्षक माना जाता है। यह सभा भारत की संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करती है और यह माना जाता है कि यह हमारी स्वतंत्रता को रुप, आकृति और गरिमा प्रदान करेगी। इस साध्य को ध्यान में रखकर हमारे नेताओं ने
♣• . संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 8, 5 नवंबर, 1948, पृष्ठ 229 ।वही, पृष्ठ 231-32 ।