70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
पर्याप्त और कठोर परिश्रम किया तथा प्रारुप संविधान का निर्माण किया जिस पर हम अभी चर्चा करने जा रहे हैं। श्रीमान्, मेरा पहला मुद्दा है कि यद्यपि डॉ. अम्बेडकर ने प्रारुप संविधान का पूरा विश्लेषण करते हुए अत्यंत कुशाग्र, ओजस्वी और साहसी भाषण दिया है....।
मैं डॉ. अम्बेडकर के भाषण का सूक्ष्म परीक्षण करने में और अधिक समय लेता। मैं उनके ज्ञान के सम्मुख नतमस्तक हूँ। उनकी भाषण पटुता के समक्ष नतमस्तक हूँ। उनके साहस के सामने नतमस्तक हूँ। लेकिन मुझे आश्चर्य है कि इतना विद्वान पुरुष भारत माता का इतना महान सपूत भारत के बारे में इतना कम जानता है। निस्संदेह वह प्रारुप संविधान की आत्मा है ओर उन्होंने अपने प्रारुप में ऐसा कुछ दिया है जो पूर्णतः अभारतीय है। अभारतीय से मेरा अभिप्राय है कि वह चाहे कितना भी खंडन करें वह पूर्णतः पाश्चात्य की दासतापूर्ण प्रतिकृति (नकल) है-इतना ही नहीं, उसके सामने दासतापूर्ण आत्मसमर्पण है।
ख्1, काजी सैयद करीमुद्दीन (मध्य प्रांत और बरार मुस्लिम)ः सभापति महोदय, भारत के प्रारुप संविधान के विचारार्थ प्रस्ताव में पेश करने के लिए डॉ. अम्बेडकर को बधाई देता हूँ। उन्होंने जो भाषण दिया वह विलक्षण था और मुझे विश्वास है कि उनका नाम भावी पीढि़याँ महान संविधान निर्माता के रुप में हमेशा याद रखेंगी...।
ख्2, प्रो. के. टी.शाह (बिहार-साधारण)ः श्रीमान्, प्रारुपण समिति और उसके अध्यक्ष को सदन के समक्ष रखे इस वृहत प्रारुप संविधान के लिए बधाई देने वालों में मैं भी शामिल हूँ। विशेष रूप से मैं विधिमंत्री का अभिनंदन करता हूँ कि उन्होंने हमारे विचारार्थ संविधान की प्रमुख रुप विशेषताओं को इतने सुस्पष्ट ढंग से प्रस्तुत किया है तथा हमें विचारोत्तेजक सामग्री दी है और वे कारण भी दिए हैं कि कुछ चीजें क्यों शामिल की गई हैं और कुछ अन्य चीजें एक खास ढंग से क्यों रखी गई हैं....।
ख्3, पं. लक्ष्मीकांत मंत्रा (पश्चिम बंगाल-साधारण)ः श्रीमान्, यदि मैंने अपने माननीय मित्र और पुराने साथी डॉ. अम्बेडकर को उनके कल के विलक्षण प्रदर्शन पर बधाई नहीं दी तो मैं अपने कर्तव्य से विमुख रह जाऊॅंगा। सदन उस विपुल समय और शक्ति की प्रशंसा करता है जो उन्होंने सांविधानिक प्रस्तावों को एक निश्चित आकार देने में लगाई है....।
ख्4, श्री रामनारायण सिंह (बिहारः साधारण)ः श्रीमान्, मैं अपने माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर को इस संविधान विधेयक को पेश करने के मौके पर बधाई देता हूँ और 12 3 4 .. संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 8, 5 नवंबर, 1948, पृष्ठ 242 ।संविधान सभा वाद-विवाद, शासकीय रिपोर्ट, 8, 5 नवंबर, 1948 पृष्ठ 252 ।वही, पृष्ठ 242-244 ।वही, पृष्ठ 246 ।