74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
साथ ही, मुझे खेद है कि वे दो आलोचनाओं से बच नहीं सकते। मेरे विचार में समिति ने अपने आप को नाजायज तौर पर संविधान समिति बना लिया। उन्होंने इस सभा द्वारा खुले सदन में अंगीकृत कुछ महत्वपूर्ण उपबंधों को बदलने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर ले लिया.....।
ख्3, श्री आर. के. सिधवार (मध्य प्रांत और बरार)ः उपसभापति महोदय, एक योग्य और सक्षम वकील के रुप में डॉ. अम्बेडकर ने प्रारुप संविधान इस सदन में बहुत साफ शब्दों में प्रस्तुत किया है और उन्होंने बाहर की दुनिया पर तथा कुछ माननीय सदस्यों पर भी अपनी छाप छोड़ी है लेकिन संविधान के मूल्यांकन का यह कोई मापदंड नहीं है। यह संविधान इस देश में लोकतंत्र के लिए तैयार किया गया है और डॉ. अम्बेडकर ने स्थानीय प्राधिकरणों तथा पंचायतों की उपेक्षा करके लोकतंत्र के विचार को ही नकार दिया है.....।
ख्4, श्री जयनारायण व्यास (जोधपुर)ः सभापति महोदय हमारे सामने जो प्रारुप संविधान है उसे तैयार करने में परिश्रम के लिए हमें डॉ. अम्बेडकर और उनके साथियों तथा टंककों एवं प्रतिलिपिकारों को धन्यवाद देना होगा। यह एक बहुत वृहद प्रारुप है और इसमें बहुत सारी चीजें शामिल की गई हैं.......
ख्5, श्री बी. ए. भंडलोई (मध्य प्रांत और बरार साधारण) ः उपसभापति महोदय, प्रारुपण समिति के अध्यक्ष डॉ. अम्बेडकर ने अपने स्पष्ट भाषण में प्रारुप संविधानों के प्रमुख तत्चों की व्याख्या की है। शासन प्रणाली क्या है और देश का संविधान क्या है, उठाये गए इन प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने बताया कि शासन प्रणाली परिसंघीय प्रकार की है जिसमें एक मजबूत केन्द्र होगा तथा एक न्यायपालिका एवं मूलभूत कानूनों में एकरुपता सहित शासन की संसदीय प्रणाली होगी। उन्होंने यह भी कहा है कि स्थिरता की अपेक्षा उत्तरदायित्व पर अधिक जोर दिया गया है। यह शांतिकाल और युद्धकाल दोनों में काफी मजबूत है। उन्होंने अपने भाषण में उन सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया है जो प्रारुप संविधान के बारे में की गई हैं तथा मेरा निवेदन है कि उनका भाषण प्रारुप संविधान का अत्यंत विषद निरुपण है। प्रारुपण समिति द्वारा तैयार किया गया प्रारुप संविधान विभिन्न समितियों अर्थात् संघ शक्ति समिति, प्रांतीय गठन समिति, सलाहकार समिति और अल्पसंख्यक समिति की रिपोर्टों पर आधारित है। संविधान सभा ने अपनी पहली बैठक में ही हमारे संविधान के उद्देश्यों की बाबत एक संकल्प पारित कर दिया था। वह संकल्प हमारे माननीय नेता पं. जवाहर लाल नेहरू द्वारा पेश किया गया था और सर्वसम्मति से
2 ख्., सी.ए.डी. खंड 7, 6 नवम्बर, 1948, पृष्ठ 262 ।
3 वही, पृष्ठ 265 ।
4 वही, पृष्ठ 269 ।
5 वही, पृष्ठ 271 ।